मौलाना कारी इस्हाक गोरा
- फोटो : अमर उजाला
मौलाना गोरा ने कहा कि, 'औरत नाचने की चीज नहीं होती। इस्लाम ने उसे कीमती मोती का दर्जा दिया है।' उन्होंने अफसोस जताया कि डांस को इस्लामी संस्कृति से जोड़कर दिखाना शर्मनाक है।
उन्होंने यह भी कहा कि महिला को इस्लाम में मां, बहन, बेटी और पत्नी के रूप में जो सम्मान मिला है, वह किसी और पंथ में नहीं। 'महिलाओं को मंच पर लाकर तमाशा बनाना, शरीयत के बिल्कुल खिलाफ है। इस्लाम तहजीब, पर्दा और इज़्ज़त की बात करता है,'- मौलाना ने दोहराया।
उन्होंने मुस्लिम समाज को भी सलाह दी कि नौजवान लड़कियों को ऐसे आयोजनों से दूर रखें और इस्लाम की असली शिक्षाओं को अपनाएं।