सहारनपुर में बुखार, डेंगू और चिकनगुनिया के कहर पर स्वास्थ्य विभाग का रवैया भले ही लापरवाह हो, मगर मेडिकल कालेज की लैब के आंकड़े अफसरों की कागजी खेल की पोल खोल रही है।
मेडिकल कालेज की लैब में जांच के लिए आए डेंगू के मरीजों के सैंपल में 25 फीसदी पॉजिटिव मिले हैं। जबकि जिला अस्पताल में डेंगू जांच की मशीन एलाइजा खराब पड़ी होने से यहां किसी की जांच नहीं हो पाई।
उधर, निजी लैब में डेंगू और चिकनगुनिया के पॉजिटीव पाए जाने का आंकड़ा 80 फीसदी के ऊपर है। स्वास्थ्य विभाग ने अब तक बुखार, मलेरिया, चिकनगुनिया और डेंगू से एक भी मौत मानने से इनकार कर रहा है।
जबकि जिले भर में इन बीमारियों से 70 से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं। मगर, स्वास्थ्य विभाग के अपने आंकड़ों में भी अब डेंगू, चिकनगुनिया और मलेरिया का कहर सामने आ रहा है।
बारिश के बाद हर साल बुखार, मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया का प्रकोप झेल रहे सहारनपुर में इन बीमारियों का असर अब भी है। मगर मच्छरों से निपटने के प्रभावी प्रयास नहीं होने से इसका असर कम नहीं हो रहा है।
हालांकि मौसम बदलने के साथ ही लोगों केे इसमें थोड़ी राहत मिल रही है। मलेरिया और डेंगू के मरीजों से अब भी जिला अस्पताल और प्राइवेट हास्पिटल में मरीज भरे पड़े हैं। जिला अस्पताल में डेंगू जांच की मशीन एलाइजा खराब पड़ी है।
ऐसे में यहां डेंगू के एक भी मरीज की पुष्टि नहीं हो पाई। जबकि मौलाना महमूद उल हसन मेडिकल कालेज में 600 मरीजों की जांच में 150 को डेंगू पॉजिटिव आया।
ऐसे ही चिकनगुनिया के यहां 28 केस पाए गए। जिला अस्पलाल में हुई जांच में करीब 13 सौ लोगों में मलेरिया पाया गया। जबकि निजी लैब और अस्पतालों के आंकड़े इससे बिल्कुल अलग हैं। निजी अस्पतालों में आने वाले मरीजों में 80 फीसदी लोग इन बीमारियों से ग्रस्त पाए गए।
सीएमआे डॉ. सईद मोहम्मद का कहना है िक बुखार, मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया के पीड़ित मरीजों को बेहतर इलाज की व्यवस्था दी गई। एंटी लार्वा के लिए गांवों में छिड़काव आदि की व्यवस्था कराई गई। बीमारी का प्रकोप तो रहा, मगर उसके रोकथाम के भी पूरे प्रयास किए गए।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों में भले ही हकीकत से काफी कम मरीज हैं। मगर, इससे पहले तक स्वास्थ्य विभाग डेंगु और चिकनगुनिया के प्रकोप तक को मानने से इनकार करता रहा है।
सहारनपुर में इन बीमारियों से इस वर्ष करीब 70 मौतें हो चुकी हैं, मगर, स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों में एक भी मौत नहीं है। यह सवाल इसलिए भी जौलीग्रांट देहरादून और पीजीआई चंडीगढ़ तक यहां के मरीजों की डेंगू और चिकिनगुनिया की मौत से पुष्टि कर रहा है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी किस आधार पर इसे नकार रहे है। जबकि अस्पताल में जांच करने के लिए मशीनें तक नहीं है।