सहारनपुर। कोरोना संक्रमण के कारण काल के गाल में समाए अंजनीकांत का इकलौती बेटी अंतिम दर्शन तक नहीं कर पाई। वह मुंबई में रहती है, पिता के निधन की सूचना मिलने पर वह सहारनपुर आने के लिए एयरपोर्ट भी पहुंची, लेकिन कोविड की नेगेटिव जांच रिपोर्ट न होने के कारण एयरपोर्ट से लौटना पड़ा। इसके बाद सामाजिक लोगों ने अंजनीकांत का अंतिम संस्कार कराया।
अंजनीकांत आईटीसी में नौकरी करते थे। उनकी इकलौती बेटी पायल शादीशुदा है और मुंबई में रहती है। अंजनीकांत सहारनपुर में अहाता शिवदयाल खलासी लाइन में अपनी पत्नी के साथ रहते थे। वह दोनों कोरोना पॉजिटिव होने पर होम आइसोलेट थे। शुक्रवार को अंजनीकांत का निधन हो गया। इसके बाद अंजनीकांत के अंतिम संस्कार को लेकर संकट खड़ा हो गया, क्योंकि पत्नी के अलावा यहां उनका कोई रिश्तेदार या परिजन नहीं है।
इसी क्षेत्र के पार्षद चंद्रजीत सिंह उर्फ निक्कू ने बताया कि इसका पता चलने पर समाज के लोगों ने पहले तो अंजनीकांत की पत्नी को राजकीय मेडिकल कॉलेज भिजवाने की व्यवस्था की। फिर उनकी बेटी पायल से संपर्क किया। पायल और उनके पति मुंबई से सहारनपुर आने के लिए तैयार हुए और एयरपोर्ट भी पहुंच गए थे, लेकिन वहां से कोविड की नेगेटिव जांच रिपोर्ट न होने के कारण घर लौट गए। इसके बाद अंबाला रोड स्थित शिवपुरी श्मशान भूमि समिति के अध्यक्ष राजन अग्रवाल, पार्थ आदि ने मिलकर लकड़ी आदि का इंतजाम कराया और तब जाकर अंजनीकांत का अंतिम संस्कार कराया गया।
कोविड प्रोटोकॉल में हुए तीन अंतिम संस्कार
सहारनपुर। अंबाला रोड स्थित श्मशानघाट पर शुक्रवार को कोरोना संक्रमण से मरने वाले तीन लोगों के शवों का अंतिम संस्कार कराया गया। इसके अलावा तीन सामान्य मौत वाले शवों का भी संस्कार हुआ। बीते कई दिन से इस श्मशान घाट पर छह से आठ शवों का संस्कार हो रहा है। वहीं, नुमाइश कैंप स्थित श्मशान घाट पर भी शुक्रवार को संक्रमण से मरने वाले तीन लोगों के शवों का अंतिम संस्कार हुआ।