देवबंद। दारुल उलूम में हुए वार्षिक इनामी जलसे में शैक्षिक सत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्रों को दीनी किताबें और नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। इस दौरान संस्था के सदर मुदर्रिस मौलाना अरशद मदनी ने दारुल उलूम को बुजुर्गों की अमानत बताते हुए इसकी हिफाजत को सभी की जिम्मेदारी बताया।
बृहस्पतिवार रात संस्था के दारुल हदीस हॉल में हुए दो दिवसीय कार्यक्रम में मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि दारुल उलूम से शिक्षा हासिल करने वाले छात्र देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी इल्म की रोशनी फैला रहे हैं। उन्होंने कहा कि संस्था से तालीम पूरी करने वाले तलबा अपने-अपने क्षेत्रों में जाकर दीन की खिदमत करें। उन्होंने संस्था की शैक्षिक व्यवस्था और छात्रों की कक्षाओं में उपस्थिति पर संतोष जताया। अध्यक्षता कर रहे संस्था के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी ने छात्रों से अपने अकाबिर के जीवन का अध्ययन करने और उनके इल्मी व अमली नक्शेकदम पर चलने की नसीहत की।
संचालन मौलाना सलमान बिजनौरी ने किया। संस्था के शिक्षा प्रभारी मौलाना हुसैन अहमद हरिद्वारी ने वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत की। शैक्षिक प्रदर्शन में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले मौलवी वफा उर रहमान बिजनौरी को विशेष पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। इसके अलावा दारुल उलूम की मजलिस-ए-शूरा के वरिष्ठ सदस्य व असम के विधायक मौलाना बदरुद्दीन अजमल की ओर से भी पुरस्कार प्रदान किए गए।