बड़गांव में क्षतिग्रस्त हुए गर्डर का पुनः निर्माण करते कर्मी। संवाद
बड़गांव। दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के क्षतिग्रस्त हुए पांचों गर्डर नए बन कर तैयार हो गए हैं। अभी इन्हें सूखने में 15 दिन का समय लगेगा। इसके बाद इन्हें गंगनहर के फ्लाईओवर के ऊपर रख दिया जाएगा।
बता दें, कि गत 23 मार्च की रात्रि में बड़गांव के गांव मोरा के समीप गंगनहर के निर्माणाधीन फ्लाईओवर पर दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के पांच सीमेंटेड गर्डर गिर कर टूट गए थे। इनकी चपेट में आकर दो मजदूर भी घायल हो गए थे। इस हादसे के बाद एनएचएआई की तकनीकी टीम ने भी मौके पर पहुंच कर जांच की थी। उसके बाद तेजी के साथ दिल्ली-देहरादून के बीच एक्सप्रेसवे का निर्माण कार्य चलाया गया था। हादसे के दौरान टूटे पांच गर्डर का निर्माण कंपनी ने पूरा कर दिया है। एनएचएआई के साइट इंजीनियर सोनू सिंह ने बताया कि शीघ्र ही सीमेंट से कवर करने के बाद इन्हें 15- 20 दिन धूप में सूखने के लिए रखा जाएगा।
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एआइएमजीसी तकनीक का हो रहा इस्तेमाल
एनएचएआई प्रधानमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे निर्माण में विदेशी एआइएमजीसी (आटोमेटेड इंटेलिजेंस मशीन गाइडेड कंस्ट्रक्शन) तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। इस तकनीक से सड़क निर्माण में निर्धारित मात्रा और गुणवत्ता में ही निर्माण सामग्री का प्रयोग सुनिश्चित होगा। इससे एक्सप्रेसवे कम से कम दस साल तक टिकाऊ बना रहेगा।