दलित उत्पीड़न की घटनाओं के विरोध में दलित संगठनों ने रविवार को देहरादून रोड स्थित संत रविदास छात्रावास में पंचायत की। पंचायत में जिलेभर से सैकड़ों पुरुष और महिलाओं ने हिस्सा लिया, जिनमें युवाओं की संख्या सबसे अधिक थी।
संगठनों की ओर से सिटी मजिस्ट्रेट को राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम का ज्ञापन सौंपा गया, जिसमें प्रशासन को दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए दस दिन का समय दिया गया। अन्यथा की स्थिति में आंदोलन करने की चेतावनी दी गई।
गागलहेड़ी के गांव घड़कौली में बाबा साहब डॉ. अंबेडकर की प्रतिमा पर कालिख पोतने के बाद से दलित संगठनों में उबाल है। दलित संगठनों का आरोप है कि पुलिस ने दोषियों पर कार्रवाई करने की बजाय दलितों पर ही मुकदमे कर दिए हैं।
आरोप है कि पुलिस ने दलित पक्ष की ओर से मुकदमा भी दर्ज नहीं किया है। शहर के साथ ही देहात क्षेत्र के कई हजार पुरुष और महिलाएं वाहनों से पहुंच चुके थे। जो हाथों में बैनर और तख्तियां लेकर पहुंचे थे और नारे लगा रहे थे।
वक्ताओं ने गांव दरियापुर, घड़कौली, डिंगोली, फतेहपुर, सरकड़ी खुमार समेत अनेक जगहों पर पेश आई दलित उत्पीड़न की घटनाओं का जिक्र करते हुए पुलिस और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए। पंचायत के दौरान ज्ञापन देने के लिए डीएम और एसएसपी को मौके पर बुलाने की मांग उठी, मगर बाद में सिटी मजिस्ट्रेट राकेश कुमार गुप्ता उनके बीच पहुंचे।
ज्ञापन सौंपने वालों में राजकुमार, नितिन गौतम, पंकज कुमार, अमित कुमार, संजीव दुर्जन, आकाश चौहान, राजबल सिंह, चेतन कुमार, विजय कुमार, मनजीत सिंह, विनोद कुमार, अजय कुमार, विनय आर्य, आशु बर्मन, प्रवीन, उमेश गौतम समेत अनेक लोग शामिल रहे।
चंदा इकट्ठा किया ः पंचायत के दौरान कुछ युवक हाथों में गत्ते के बॉक्स लिए घूम रहे थे, जिनमें लोगों से चंदा इकट्ठा किया गया। आयोजकों ने बताया कि यह चंदा घड़कौली प्रकरण में पुलिस के लाठीचार्ज से चोटिल हुए लोगों के इलाज और पंचायत के आयोजन में खर्च किए जाएंगे।