- न पूरा स्टाफ और न अपराधियों को पकड़ने के लिए वाहन
अमर उजाला ब्यूरो
सहारनपुर। साइबर अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस लाइन में मंडल स्तर का साइबर थाना तो स्थापित कर दिया गया। मगर इसकी हालत साइबर सेल जैसी ही है। यहां अब तक पर्याप्त संसाधन ही नहीं हैं। न तो थाने में पूरा स्टाफ है और न ही अपराधियों को पकड़ने के लिए वाहन या वाहन चालक। इन हालात में साइबर अपराधों पर नियंत्रण खुद में एक चुनौती है।
पिछले कुछ समय से लगातार बढ़ते साइबर अपराधों को देखते हुए ही मंडल स्तर पर यह साइबर थाना बनाया गया। इसी थाने में मंडल के सहारनपुर, शामली और मुजफ्फरनगर के साइबर अपराध से जुड़े मामलों की जांच होनी है। लेकिन इस जांच को जल्द पूरा करने के लिए जरूरी स्टाफ अब तक नहीं मिल पाया है। तीन हेडकांस्टेबल नहीं मिले हैं। सात कांस्टेबल में से चार ही काम कर रहे हैं। कंप्यूटर या डाटा आपरेटर कम से कम तीन होने चाहिए, लेकिन यहां फिलहाल एक से ही काम चलाया जा रहा है। साइबर अपराधों के मामले में अधिकतर अपराधी बाहरी शहरों या जिलों से जुड़े होते हैं। इन्हें पकड़ने के लिए साइबर थाने के पास अब तक वाहन भी नहीं है और न ही वाहन चालक उपलब्ध है। इस बारे में पूछने पर साइबर थाना प्रभारी प्रवीण कुमार कहते हैं कि थाना बनने के बाद जरूरी संसाधनों के प्रयास भी किए जा रहे हैं। उम्मीद है कि जल्द ही बाकी व्यवस्थाएं भी हो जाएंगी और साइबर अपराध के मामलों की जांच में तेजी आएगी।