संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। उप खनिज नियमावली में किए गए संशोधन को जनपद के क्रशर उद्योग के लिए लाभकारी माना जा रहा है। अभी तक नदी तल से पांच किलोमीटर दूर उप खनिज का भंडारण करने का प्रावधान रहा है। जो व्यावहारिक रूप से दिक्कत भरा साबित हुआ। जनपद में 45 भंडारण के लाइसेंस हैं।
प्रदेश में रामपुर, सहारनपुर और बिजनौर जनपदों में नदी में बालू, बजरी और बोल्डर मिलता है। जबकि प्रदेश के अन्य अधिकांश जनपदों में नदी की बजाए पहाड़ से बोल्डर लिया जाता है। जिले में नदी से प्राप्त होने वाले बोल्डर को क्रशरों में प्रोसेस कर गिटटी बनाई जाती है। लेकिन नदी तल से पांच किलोमीटर दूर ही खनिज भंडारित करने के नियम के चलते क्रशर स्वामी परेशान रहते थे। क्योंकि नदी तल पर ही खनन का पटटा होता है। इसलिए पटटे से पांच किलोमीटर दूर भंडारण करना व्यवहारिक रूप से परेशान करने वाला है। जनपद में 45 लोगों के पास भंडारण के लाइसेंस हैं। वे ही क्रशर संचालित कर रहे हैं। स्टोन क्रशर एसोसिएशन के सचिव नौशाद प्रधान का कहना है कि यह क्रशर उद्योग के लिए अच्छी खबर है। काफी दिनों से इसकी मांग हो रही थी।
-बिल्डिंग मैटिरियल के दाम घटने की संभावना
अब पांच किलोमीटर की शर्त में राहत मिलने से न सिर्फ क्रशर उद्योग को राहत मिलेगी बल्कि बिल्डिंग मैटिरियल व्यापारियों को भी फायदा होगा। इससे बिल्डिंग मैटिरियल के दाम में भी कमी आने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि नई नियामवली लागू होने पर आम आदमी को इसका क्या लाभ मिलेगा, यह भविष्य में पता चलेगा।
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जिला खान अधिकारी आशीष कुमार ने बताया कि उनके पास इसके बारे में अभी तक कोई शासनादेश नहीं आया है। इसलिए इसके बारे में वे कुछ कहने की स्थिति में नहीं हैं। शासनादेश आने के बाद ही पूरी तरह स्थिति स्पष्ट होगी। हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि यदि भंडारण के लिए पांच किलोमीटर की शर्त में राहत दी गई तो जनपद के क्रशरों के लिए लाभकारी साबित होगा।