सहारनपुर। जिले में एटीएस तथा एसटीएफ आई और अपनी कार्रवाई कर चली गई, साथ ही संकेत भी दे गई कि जिले में संदिग्ध गतिविधियां हो रहीं हैं, स्लीपर सेल भी सहारनपुर में है। फिर भी पुलिस की आंख नहीं खुली। पुलिस ने अभी तक यह भी पता नहीं लगाया कि जिले में काश्मीर, म्यांमार एवं अन्य दूर दराज के क्षेत्रों से कितने परिवार कहां पर रह रहे हैं।
जिले में आतंकियों के होने का खुलासा एटीएस और एसटीएफ की छापामारी से हो चुका है। देवबंद से आतंकी फैजान फरार हो गया है, जबकि देवबंद से मुजफ्फरनगर में जाकर शरण लेने वाले अब्दुल्ला को गिरफ्तार कर लिया गया है। इस कार्रवाई से सहारनपुर में न सिर्फ आतंकी स्लीपर सेल होने की एक बार फिर से पुष्टि हो गई है, बल्कि आतंकी गतिविधियां भी लगातार होने की बात भी सामने आ चुकी है। लेकिन पुलिस अभी तक इस मामले से अपने को पूरी तरह से अलग रखे हुए है। इतना सब होने के बावजूद पुलिस हरकत में नहीं आई है। पुलिस ने सर्वे तक कराने की जरूरत नहीं समझी। दो सप्ताह पहले ही म्यांमार और काश्मीर के दर्जनों परिवारों के सहारनपुर में अलग-अलग जगहों पर रहने का भी खुलासा हो चुका है, फिर भी पुलिस लापरवाह बनी हुई है।
ऐसा पहली बार नहीं हुआ है कि सहारनपुर का आतंकी कनेक्शन सामने आया हो। यहां लगातार आतंकी गतिविधियां होने का खुलासा होता रहा है। इससे पहले यहां लश्करे तैयबा, जैश ए मोहम्मद जैसे प्रतिबंधित संगठनों के आतंकवादी पकड़े जा चुके हैं। देवबंद से दिल्ली और मुंबई पुलिस कई बार संदिग्धों को पकड़कर ले जा चुकी है। संसद हमले जैसे मामलों में सहारनपुर का नाम आ चुका है। लेकिन इन सभी मामलों की जानकारी होते हुए भी पुलिस निष्क्रिय बनी रही। किसी भी क्षेत्र में विदेशियों के रहने की पहचान तक नहीं कराई गई। पुलिस की निष्क्रियता के चलते ही सहारनपुर को आतंकी संगठनों ने महफूज मान लिया है और यह स्लीपर सेल स्थापित कर दिए गए हैं।