फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

खातों की जांच के बाद की जाएगी पूरी रिकवरी

विज्ञापन
विज्ञापन
खातों की जांच के बाद की जाएगी पूरी रिकवरी
विज्ञापन

सहारनपुर। बेहट क्षेत्र के बादशाही बाग में फर्जी तरीके से कादरिया उल उलमा एंग्लो मदरसा संचालित करने के नाम पर 58 लाख रुपये हड़पने के मामले में जांच प्रक्रिया तेज हो गई है। इस मदरसे की प्रक्रिया से जुड़े सभी खातों की छानबीन के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। अल्पसंख्यक विभाग दावा कर रहा है कि खातों की पड़ताल पूरी होते ही सरकारी धन की पूरी रिकवरी कराई जाएगी।
बता दें कि जिला अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने उन खातों की डिटेल मंगवाई है, जिनके जरिए 58 लाख रुपये हड़पे गए हैं। इसके अलावा उन लोगों को पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है, जिन्होंने यह धनराशि हड़पी है। यह मदरसा 2012 में बंद हो गया था, जिसका शपथ पत्र भी मदरसा संचालक दे चुका था। लेकिन उसके बाद भी मदरसा कागजों में संचालित होता रहा। अधिकारियों ने भी माना है कि इसमें विभागीय कर्मचारियों और अधिकारियों की मिलीभगत रही है। इसी वजह से विभाग गहनता से जांच में जुटा है और शासन को रिपोर्ट भेजी जा चुकी है। विभाग चाहता है कि पहले सभी के नाम सामने आ जाएं ताकि नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई जाए। जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी शरद कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि एक-एक खाते को खंगाला जा रहा है। पूरे पैसे की रिकवरी कराई जाएगी। मामले को लेकर शासन गंभीर है। हर पहलू से जांच हो रही है। इसके अलावा पुराने प्रकरणों की फाइलों को भी निकलवाया जा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

18 मदरसों की जांच अब तक आगे नहीं बढ़ सकी
सहारनपुर। मदरसे के कागजों में संचालन का मामला एक साल पहले भी सामने आया था। अब 58 लाख रुपये के घोटाले के मामले ने पुराने मामलों को ताजा कर दिया है। आनलाइन पंजीकरण के दौरान नवंबर 2018 में जनपद में 18 ऐसे मदरसे पकड़े गए थे, जो कागजों में ही संचालित हो रहे थे। तत्काल प्रभाव से इन मदरसों की मान्यता रद्द कर दी गई थी। मगर, जब से जांच की फाइलें ठंडे बस्ते में पड़ी है। इन मदरसों के माध्यम से कितना पैसा सरकार से प्राप्त किया गया था। इस दिशा में जांच आगे ही नहीं बढ़ी। मामले का खुलासा आनलाइन पंजीकरण के दौरान हुआ था। उस समय जनपद के करीब 33 मदरसा संचालकों ने पोर्टल पर पंजीकरण नहीं कराया था। जिला अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने इन मदरसा संचालकों को नोटिस भेजे थे। 18 मदरसा संचालकों को छोड़कर बाकी ने नोटिस का जवाब दिया था। लेकिन 18 संचालकों ने जवाब नहीं दिया, जिस पर तत्काल प्रभाव से इनकी मान्यता रद्द करते हुए तत्कालीन मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में जांच कमेटी गठित की गई थी। मगर, 18 माह बीतने के बाद भी जांच वहीं तक अटकी हुई है। जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी शरद कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि उन्होंने कुछ समय पूर्व ही चार्ज लिया है। जिन 18 मदरसों की मान्यता रद्द हुई थी, उनकी जांच दोबारा कराई जाएगी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें