बंद कर दिए थे बेहट की ओर जाने वाले सभी रास्ते
सहारनपुर। दलित संगठनों के भारत बंद के आह्वान पर सोमवार को कई गांव के दलितों ने बेहट की ओर जाने वाले सभी रास्ते पूरी तरह बंद कर दिए। चक देवली और नाजिरपुरा के बीच में जाम लगा दिया गया। सूचना मिलते ही एसडीएम सदर, एसपी ट्रैफिक, सीओ द्वितीय और शहर के अनेक थानों की पुलिस मौके पर पहुंची। करीब पांच घंटे बाद यहां जाम खुला।
बेहट रोड पर चक देवली और नाजिरपुरा अड्डे पर आसपास के गांवों के दलित युवक और महिलाएं सुबह आठ बजे से ही इकट्ठा होना शुरू हो गए थे। करीब नौ बजे उन्होंने सड़क पर जाम लगा दिया। जाम की वजह से लोगों ने पुराना कलसिया रोड से निकलने की सोची। इसके बाद पुराना कलसिया रोड पर बसे गांवों के दलितों ने पुराना कलसिया रोड भी जाम कर दिया। इसकी वजह से लोग बीच में ही फंस गए। कुछ लोगों ने गांव मढ़ की ओर से निकलने का प्रयास किया, मगर वहां भी जाम लगा दिया गया। बेहट रोड के ही गांव बालपुर और रसूलपुर के पास डाली जा रही पाइपलाइन के पाइपों को दलितों ने जगह-जगह सड़क के बीच में डालकर मार्ग को पूरी तरह अवरुद्ध कर दिया। सूचना मिलते ही एसडीएम सदर संगीता, एसपी ट्रैफिक विनीत भटनागर, सीओ द्वितीय मुकेश मिश्रा और शहर के सभी थानों के प्रभारी फोर्स लेकर मौके पर पहुंचे। मौके पर पहुंच रहे अधिकारियों को रास्ते में सड़कों पर डाले गए पाइप खुद ही हटाने पड़े। एसडीएम और सीओ ने जाम लगा रहे लोगों को समझाने का प्रयास किया। एसडीएम और सीओ बार-बार जाम खोलने की गुहार लगाते रहे। मगर दलित नहीं माने। एक समय ऐसा रहा, जब एसडीएम और सीओ बेबस होकर साइड में खड़े हो गए। करीब साढ़े 11 बजे पुलिस को सूचना मिली कि दलित संगठनों ने घंटाघर पर जाम लगा दिया है। एक दुकान में तोड़फोड़ भी कर दी गई है। इसके बाद कोतवाली सदर प्रभारी समेत कई थानों की पुलिस घंटाघर की ओर दौड़ पड़ी, लेकिन एसडीएम और सीओ द्वितीय चक देवली में ही डेरा डाले रहे। शहर में डीएम द्वारा ज्ञापन लेने की सूचना मिलने के बाद दोपहर करीब दो बजे दलितों ने खुद ही जाम खोल दिया। इसके बाद अधिकारियों और पुलिस ने राहत की सांस ली।
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जाम लगाने में महिलाएं रहीं आगे
चक देवली में जाम खुलवाने के लिए एसडीएम और सीओ प्रदर्शनकारियों ने जाम खोलने की गुजारिश करते रहे। एक बार कुछ पुरुष तो जाम खोलने को तैयार हो गए, मगर महिलाएं जाम लगाने पर अड़ी रहीं। उनका कहना था कि जब से मोदी और योगी की सरकारें आई हैं, दलितों का उत्पीड़न बढ़ा है। दलितों को संत रविदास जयंती और बाबा साहेब आंबेडकर जयंती पर शोभायात्राएं निकालने से रोका जा रहा है। प्रशासन अनुमति नहीं दे रहा है। सीओ द्वितीय मुकेश मिश्रा बार-बार दोहराते रहे कि उनकी सब मांगे मान ली जाएंगी, मगर जाम खोल दो। मगर महिलाएं सड़क पर बीचोंबीच बैठ गईं।
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बेहट रोड के तमाम बाजार बंद रहे
दलित संगठनों के जाम और प्रदर्शन की वजह से देवला, चक देवली, नाजिरपुरा, रसूलपुर और बेहट बस अड्डा तक सभी दुकानें और बाजार बंद रहे। बेहट रोड की निजी बसें न चलने की वजह से यात्री बेहट बस अड्डे पर भटकते नजर आए। बसों का संचालन भी करीब पांच घंटे तक बंद रहा। अनेक यात्रियों को अपने गंतव्य तक पैदल ही पहुंचना पड़ा।
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राहगीरों के साथ गाली-गलौज भी हुई
बेहट रोड पर प्रदर्शनकारियों ने कई राहगीरों के साथ गाली-गलौज भी की। जाम के बावजूद कुछ वाहन चालक आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे थे। जिन्हें दलित युवकों ने गालियां देकर लौटाया। ज्यादातर दलित युवकों के हाथ में डंडे और मुंह पर नकाब बंधा था। ऐसे में राहगीर चाहकर भी विरोध नहीं कर सके।