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जिंदगी भर का जख्म दे गया कोरोना

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देवबंद (सहारनपुर)। पिता की आजीविका से परिवार का पालन होता था। पिता को कोरोना ने छीन लिया तो, बच्चों के सामने रोटी का संकट आ गया। क्योंकि परिवार में कोई कमाने वाला नहीं है। मां के कंधों पर जिम्मेदारी आ गई है, चिंता यही है कि बच्चों का पालन कैसे किया जाए।
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उमा शर्मा के कंधे पर परिवार का बोझ
गांव साखन खुर्द निवासी उमेश शर्मा (46) देवबंद सिविल कोर्ट में अधिवक्ता थे। 15 अप्रैल को उन्हें खांसी, जुकाम व बुखार आया। 28 अप्रैल को सांस लेने में दिक्कत आने पर चिकित्सक ने कोरोना के लक्षण बताकर सरकारी अस्पताल ले जाने की सलाह दी। सीएचसी में कोविड टेस्ट हुआ और एंटीजन रिपोर्ट नेगेटिव आई, लेकिन उमेश शर्मा की स्थिति बिगड़ती चली गई। फिर उन्हें जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। वहां भी उनकी स्थिति में सुधार नहीं आया तो परिजन 29 अप्रैल को ऑक्सीजनयुक्त गाड़ी से उन्हें यमुनानगर लेकर चल पड़े, लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई। अब परिवार में दो बच्चों अंशित (15) और बेटी छवि (14) के पालन पोषण की जिम्मेदारी उनकी पत्नी उमा शर्मा के कंधों पर आ गई। उमा शर्मा ने बताया कि परिवार में अब कमाने वाला कोई नहीं है। उनके हिस्से में सिर्फ तीन बीघा जमीन आती है, जबकि बच्चे 12वीं कक्षा में पढ़ रहे हैं। गुजर बसर कैसेे होगी, यही चिंता रहती है।
नवीन की कोरोना से मौत, पत्नी और दो बच्चों के रोजी रोटी का संकट
छुटमलपुर। मुजफ्फराबाद ब्लाक के गांव गदरहेड़ी निवासी नवीन गोयल (32) पुत्र फूल सिंह इंडेन गैस एजेंसी पर डिलीवरी मैन का काम करते थे। अप्रैल के आखिरी सप्ताह में उन्हें बुखार हुआ। परिजन उन्हें सहारनपुर जिला अस्पताल ले गए। जहां उन्हें कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई। हालत बिगड़ने पर उन्हें हरियाणा के जगाधरी स्थित अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां 10 मई को उनकी मौत हो गई।
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नवीन की मौत के बाद उसकी पत्नी कामेश उर्फ रीना और दो छोटे बच्चों गोरी (12) और कन्हैया (9) के सामने भरण पोषण का संकट खड़ा हो गया। पिता कमा कर लाते थे तो परिवार की गुजर बसर होती थी। गोरी कक्षा आठ तथा कन्हैया कक्षा तीन में पढ़ता है। रीना बताती है कि जो जमा पूंजी थी, वह तो खत्म हो ही गई घर में रखा अनाज तक बेचकर बीमारी में लगा दिया था। परिवार के पास आय का कोई साधन नहीं है। जमीन भी उनके पास नहीं है। ऐसे में दो वक्त की रोटी जुटानी भी मुश्किल हो रही है। घर के नाम पर भी टीन शेड पड़ा है।
चिह्नित हुए हैं ऐसे 15 बच्चे
सहारनपुर। कोरोना काल में जिन बच्चों के माता-पिता का निधन हो गया है या फिर माता पिता में से किसी एक का निधन हुआ है, उनको प्रोबेशन विभाग भी चिह्नित कर रहा है। जिले में अभी तक ऐसे 15 बच्चे चिह्नित हुए हैं, जिनके सिर से माता पिता का साया उठ चुका है। इसके अलावा 288 बच्चे ऐसे हैं, जिनके माता या पिता किसी एक की मृत्यु हो चुकी है।
अपील
कोरोना महामारी ने कई बच्चों से उनके माता पिता को छीन लिया है। प्रदेश सरकार इनके प्रति संवेदनशील दिखाई देती है। बेसहारा बच्चों के भरण पोषण को लेकर भी घोषणा की गई है। अमर उजाला ऐसे बच्चों की पहचान का अभियान शुरू कर रहा है। हम सरकार और ऐसे जरूरतमंद बच्चों के बीच सेतु बनकर उन्हें मदद दिलवाने का प्रयास करेंगे। आपको अपने आसपास ऐसे बच्चों के बारे में कोई जानकारी हो तो कृपया हमें 9675899767 पर व्हाट्सएप के जरिये बताएं, अथवा saharanpurbureau@mrt.amarujala.com पर ई-मेल करें।
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