सहारनपुर। कोरोना ने सब कुछ छीन लिया। जो परिवार की आजीविका के सहारा थे, वह भी नहीं रहे। ऐसे में किसी के परिवार की महिला सिलाई करके जैसे तैसे रोटी का इंतजाम कर रही है तो एक परिवार की गुजर बसर के लिए आईटीआई करने वाले वाला बेटा अब पिता की हेयर सैलून की दुकान चलाने को मजबूर होगा। ऐसी पीड़ा दी है इस क्रूर कोरोना ने। इससे उबरने के लिए पीड़ित परिवारों को सरकार की तरफ से मदद की दरकार है। प्रशासन की तरफ से ऐसे बच्चों की सूची भी बनाई जा रही है, जिनके माता या पिता का निधन होने पर उनकी गुजर बसर कठिन हो रही है, लेकिन अभी इन परिवारों को मदद नहीं मिल पाई है।
सिलाई कर आमदनी से कर रही गुजर बसर
शहर के मोहल्ला कायस्थान चौक निवासी अमिताभ भटनागर की मृत्यु 29 अप्रैल को हुई। वह कोरोना संक्रमित थे और राजकीय मेडिकल कॉलेज में भर्ती थे, लेकिन कोरोना से जंग को जीत नहीं पाए। उनकी पत्नी बबीता के कंधों पर अब परिवार का बोझ आ गया है। परिवार में बेटी आकांक्षा (12 वर्ष) कक्षा 7 वीं में पढ़ रही है तो, बेटा ओम भटनागर कक्षा 4 में पढ़ रहा है। बीते एक साल से कामकाज ठप है, ऐसे में इन दोनों बच्चों की स्कूल फीस तक जमा करने में कठिनाई सामने आ रही है। सिलाई करके जो आमदनी होती है, उससे रोटी का इंतजाम हो पाता है।
करना पड़ेगा हेयर सैलून पर काम
नकुड़ तहसील के गांव साढ़ोली निवासी नाथीराम (43) को खांसी, बुखार था और कोरोना के भी लक्षण थे। ऑक्सीजन स्तर भी 31 रह गया था। सात मई को परिवार वाले उनको सहारनपुर ला रहे थे, लेकिन उन्होंने रास्ते में दम तोड़ दिया था। परिवार में नाथीराम की पत्नी मुकेश देवी के अलावा बेटा सागर (19) और बेटी निकिता हैं। यह दोनों आईटीआई कर रहे हैं। नाथीराम सढ़ोली गांव के बाहर मुख्य मार्ग पर हेयर सैलून चलाते थे, यही परिवार की आजीविका का साधन था और बच्चों की पढ़ाई का खर्च भी उसी से निकलता था। अब परिवार के सामने संकट है कि घर कैसे चलेगा और बच्चों की पढ़ाई का खर्च कहां से आएगा। इनके रिश्तेदार सतेंद्र का कहना है कि मजबूरी में सागर को ही पिता की हेयर सैलून की दुकान चलानी होगी।