एक्साइज ड्यूटी के विरोध में सराफा कारोबारियों मामला गर्मा गया है। सराफा पंचायत के धरने में भूख हड़ताल पर बैठे व्यापारी की हालत बिगड़ने से प्रशासन में हड़कंप मच गया।
आनन-फानन में चिकित्सकों की टीम ने धरना स्थल पर पहुंचकर व्यापारी के स्वास्थ्य की जांच की। उधर, सराफा पंचायत पदाधिकारियों ने दो सरकार को चेतावनी देते हुए कहा है कि वह सराफा कारोबारियों के हितों के लिए कोई भी कुर्बानी देने को तैयार हैं।
सराफा पंचायत 38 दिन से आंदोलन की राह पर है, जिससे हजारों सराफा कारोबारी जुड़े हुए हैं। सरकार से अपनी मांग मनवाने के लिए व्यापारी राकेश गुप्ता बृहस्पतिवार की सुबह भूख हड़ताल शुरू की थी।
उनके साथ सैकड़ों व्यापारी भी धरने पर बैठकर अपना विरोध जता रहे हैं। शुक्रवार को भी राकेश गुप्ता की हालत बिगड़ गई थी। उस समय भी जिला अस्पताल के चिकित्सकों ने मौके पर जाकर उनके स्वास्थ्य की जांच की थी। मगर शनिवार की शाम अचानक उनकी तबीयत ज्यादा खराब हो गई, जिससे मौके पर मौजूद सराफा कारोबारियों में रोष फैल गया।
सूचना मिलते ही जिला अस्पताल के चिकित्सकों की टीम मौके पर पहुंची और उनके स्वास्थ्य की पुन: जांच की। चिकित्सकों ने भी उनकी हालत को गंभीर माना है। सराफा पंचायत के मुख्य संयोजक पवन गोयल ने कहा कि सराफा कारोबारी 38 दिन से लगातार आंदोलन कर रहे हैं, मगर सरकार की ओर से कोई बयान अभी तक नहीं आया है।
उन्होंने सरकार पर उनके आंदोलन को विफल करने की साजिश रचने का आरोप भी लगाया। रामराजीव सिंघल ने कहा कि सराफा कारोबारी 38 दिन से अपनी दुकानें बंद रखकर आंदोलन कर रहे हैं। ऐसे में उन्हें प्रतिदिन आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है।
सरकार ने एक्साइज ड्यूटी लगाकर उनके कारोबार को ठप करने का काम किया है। मांग न माने जाने तक आंदोलन जारी रहेगा। धरने पर पवन गोयल, राजराजीव सिंघल, संजीव जैन, विपिन अग्रवाल, कांति जैन, वैभव जैन, राजकुमार जैन, राकेश जैन, वैभव अग्रवाल समेत सैकड़ों सराफा कारोबारी उपस्थित थे।