सहारनपुर। शीतलहर चल रही है। घरों में बैठे लोगों को भी ठंड सता रही है, लेकिन उन गरीबों पर दोहरी मार पड़ रही है, जिन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना में पक्के मकान का सपना संजोया था। ऐसे पात्रों ने अपना कच्चा मकान तोड़ा मगर पक्का नहीं मिला। इनमें कोई पॉलिथीन से तो कोई तिरपाल से छत बनाकर रहने को मजबूर है। क्योंकि कोरोना काल में मार्च 2020 के बाद से बजट नहीं आने पर 9000 से अधिक मकानों का निर्माण लटका हुआ है। कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो स्नानघर तक में शरण लिए हुए हैं।
नगर निगम के वार्ड आठ के गांव बिशनपुर में आरती का मकान एक वर्ष पहले स्वीकृत हुआ था। पहली किस्त आ गई थी। चूंकि नया और पक्का मकान बनना था। ऐसे में आरती को अपना कच्चा मकान तोड़ना पड़ा। मकान की नींव भर गई और कॉलम के लिए सरियों के जाल लगा दिए गए, मगर इसके बाद कोरोना आ गया। कोरोना के चलते बजट रुकने की वजह से आरती के मकान की अगली किस्त अभी तक नहीं आई है। आरती के माता-पिता भी नहीं हैं। ऐसे में आरती अपने आंगन में बने स्नानघर में रह रही है। उसने अपने स्नानघर में सारा सामान रखा हुआ है। रसोई भी इसी में चल रही है। इसी गांव में सीत्तो के नाम से मकान स्वीकृत हुआ था। मकान लिंटर तक तैयार है, मगर अगली किस्त नहीं आ रही है। ऐसे में परिवार को ठंड से बचाने के लिए सीत्तो को तिरपाल डालनी पड़ी है। नकुड़ में नई बस्ती निवासी नूरजहां का मकान पूरा नहीं हुआ है। ऐसे में वह भी तिरपाल डालकर रह रही है। जनपद में जिन नौ हजार से अधिक मकानों का निर्माण अधूरा है। उनसे संबंधित परिवारों के सामने ठंड से बचने के लिए सिर छिपाने की चुनौती है।
कोविड काल में 735 को मिली दूसरी किस्त
कोविड-19 के कारण लॉकडाउन के बाद 726 लाभार्थियों को पहली, 1613 लाभार्थियों को दूसरी, 1815 लाभार्थियों को तीसरी किस्त के भुगतान के लिए डाटा पीएफएमएस पोर्टल पर अपलोड किया गया है। इनमें से अक्तूबर 2020 में मात्र 735 लाभार्थियों को ही द्वितीय किस्त का भुगतान सूडा मुख्यालय से लाभार्थियों के बैंक खातों में किया गया है। शेष 3455 लाभार्थियों को किस्त नहीं मिल सकी है।
एक नजर में योजना
-जिले में स्वीकृत कुल आवास----17774
-पूर्ण आवासों की संख्या-----------8139
-अधूरे पड़े आवासों की संख्या-----9190
बजट के अभाव में हजारों आवास पूर्ण नहीं हो सके हैं। मगर स्थानीय स्तर से सभी लाभार्थियों का डाटा पीएफएमएस पोर्टल पर डाला जा चुका है। दस दिन पहले वीडियो कांफ्रेंस के जरिए सूडा के निदेशक से जनवरी के अंत तक बजट जारी होने की बात कही है। जिसके बाद कार्य में तेजी आएगी।
अनुज प्रताप सिंह, परियोजना अधिकारी, डूडा।
बिशनपुर में अधूरे मकान के सामने डाली गई तिरपाल।- फोटो : SAHARANPUR