उधर, एसएसपी का कहना है कि आयोग की तरफ से पत्र मिला है, जिसमें जांच की प्रगति आख्या रिपोर्ट मांगी गई है। वह समय से भेज दी जाएगी।
यह था मामला
वर्ष 2015 में दारुल उलूम की वेबसाइट पर किसी व्यक्ति ने गजवा-ए-हिंद को लेकर जानकारी मांगी थी, जिस पर दारुल उलूम ने जवाब में पुस्तक सुन्नत-अल-नसाई का हवाला दिया था। बाल संरक्षण आयोग ने कहा था कि यह देश विरोधी है। आयोग की तरफ से जिला प्रशासन को पत्र मिला है, जिसमें कहा गया है कि जांच की प्रगति रिपोर्ट समय से भेज दी जाए।
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