उनके पारिवारिक सदस्य यज्ञपाल सिंह बोकी ने बताया कि अंतिम संस्कार मंगलवार को 11 बजे पैतृक गांव जीवाला में किया जाएगा। उनकी अंतिम यात्रा अहमद बाग स्थित आवास से सुबह आठ बजे चलकर 11 बजे गांव में पहुंचेगी। उनके निधन पर मनकामेश्वर महादेव मंदिर समिति छुटमलपुर के राज सिंह साध, कांग्रेस ओबीसी विभाग के राष्ट्रीय महासचिव मो. मुजतबा मलिक, भाजपा नेत्री मंजू शर्मा ने शोक व्यक्त किया है।
राजनीतिक सफर
महावीर राणा ने युवक कांग्रेस से राजनीतिक सफर शुरू किया था। इसके बाद उनके बड़े भाई जगदीश राणा वर्ष 1993 में जनता दल के टिकट से मुजफ्फराबाद (अब बेहट) सीट से विधायक चुने गए थे। जगदीश राणा तीन बार विधायक, सपा सरकार में कैबिनेट मंत्री और एक बार बसपा के टिकट पर सांसद रहे। महावीर राणा हमेशा बड़े भाई की राजनीति के चाणक्य की भूमिका में रहे। महावीर राणा वर्ष 2005 में वार्ड नंबर पांच से जिला पंचायत सदस्य चुने गए थे। वर्ष 2012 में बसपा के टिकट पर बेहट से विधायक बने। वर्ष 2017 में उन्होंने भाजपा के टिकट पर विधान सभा चुनाव लड़ा था। इस चुनाव में वे कांग्रेस के नरेश सैनी से हार गए थे। वर्ष 2022 में भी वे भाजपा से टिकट के प्रबल दावेदार थे, लेकिन ऐन वक्त पर उन्हें निराश होना पड़ा था। पिछले काफी समय से वे अस्वस्थ चल रहे थे।
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