सहारनपुर में अधिकारियों की उदासीनता और लोगों के गैर जिम्मेदराना रवैये ने ढमोला नदी को कूड़े के ढेर में तब्दील कर डाला है। शहर के बीच से बहने वाली नदी अब सिर्फ शहर का नाला बनकर रह गई है और पूरे शहर का कूड़ा इस नदी में ही पहुंच रहा है।
यहां तक कि निगम द्वारा भी कई स्थानों पर कूूड़ा इस नदी में ही डलवाया जा बरहा है। शहर के बीच से बहने वाली ढमोला नदी किसी समय शहर के सौंदर्य में चार चांद लगाती थी।
इस नदी में बहने वाला पानी से न सिर्फ आसपास के खेतों में पहुंचता था, बल्कि शहर के लोग भी इस नदी के पानी का उपयोग करते थे। लेकिन अब यह नदी मात्र एक नाला बनकर रह गई है।
शहर से निकलने वाला गंदा पानी तो इसमें बह ही रहा है, लोगों ने इसे कूड़ेदान भी बना दिया है। यहां तक कि शहर के कई स्थानों पर तो नगर निगम का कूड़ा भी इस नदी के किनारों पर ही डाला जा रहा है। जिससे यह नदी मात्र कूड़े के ढेर में बदलती जा रही है।
न तो सिंचाई विभाग ने ढमोला नदी पर कभी गंभीरता दिखाई और न ही इस नदी में बढ़ते प्रदूषण से शहर को हो रहे नुकसान के बार में प्रशासन ने सोचा।
जिससे न सिर्फ इस नदी का अस्तित्व ही खतरे में पड़ गया है, बल्कि संकरी होती नदी में बाढ़ के समय आने वाला पानी शहर में तबाही मचा सकता है। प्रशासन को शीघ्र ही ढमोला नदी पर हो रहे अतिक्रमण और सफाई को लेकर गंभीरता दिखानी होगी।