सहारनपुर। परिषदीय विद्यालय खुल चुके हैं, लेकिन बच्चों को इस बार अभी तक यूनिफॉर्म, जूते और स्कूल बैग का वितरण नहीं हो सका है। नतीजा ज्यादातर बच्चे बिना यूनिफॉर्म और बिना जूतों के ही विद्यालय पहुंच रहे हैं। कुछ ही बच्चे हैं, जो पुरानी यूनिफॉर्म पहनकर विद्यालय आ रहे हैं।
इस बार सरकार ने यूनिफॉर्म, स्कूल बैग, जूते और स्वेटर का पैसा विभाग के खाते की बजाय बच्चों के अभिभावकों के खातों में ट्रांसफर करने का निर्णय लिया है। इसके लिए शिक्षकों से अभिभावकों के बैंक खाता संख्या पोर्टल पर अपलोड करने के लिए कहा गया था। यह काम करीब डेढ़ माह पहले होना था। प्रदेश भर में कई हजारों शिक्षकों द्वारा एक साथ पोर्टल पर खाता संख्या अपलोड करने की वजह से पोर्टल हैंग हो गया, जिसकी वजह से बैंक खाता संख्या अपलोड नहीं हो सके हैं। अभी तक पोर्टल खराब चल रहा है। चूंकि पैसा अभिभावकों के खातों में नहीं पहुंच सका है। ऐसे में यूनिफॉर्म, जूते, स्कूल बैग आदि भी बच्चों को नहीं मिल सके हैं।
पहले यह थी व्यवस्था
पूर्व के वर्षों में बच्चों को यूनिफॉर्म शिक्षकों के द्वारा उपलब्ध कराई जाती थी। यानी यूनिफॉर्म का पैसा शासन से जारी होता था, जो विभाग के द्वारा एसएमसी (स्कूल मैनेजमेंट कमेटी) के खातों में जाता था। वहां से शिक्षक पैसा निकालकर बच्चों को यूनिफॉर्म उपलब्ध कराते थे। जूते और मोजे तथा स्कूल बैग ऊपर से ही आते थे, जिनका वितरण किया जाता था।
1438 विद्यालयों में एक लाख 83 हजार बच्चे
जिले में परिषदीय और एडेड विद्यालयों की संख्या 1438 है। इनमें कक्षा एक से आठ तक के करीब एक लाख 83 हजार विद्यार्थी पंजीकृत हैं। कक्षा एक से पांच तक की संख्या करीब एक लाख 20 हजार है, जबकि शेष करीब 63 हजार कक्षा छह से आठ के विद्यार्थी हैं।
सामान और उसके दाम
अभिभावकों के खातों में करीब 1100 रुपये भेजे जाने हैं। इनमें प्रत्येक बच्चे की दो यूनिफॉर्म के लिए 600 रुपये, जूते और स्वेटर के लिए 200-200 रुपये तथा स्कूल बैग के लिए 100 रुपये निर्धारित हैं।
यूनिफॉर्म और अन्य सामग्री के लिए अभिभावकों के खातों में पैसा भेजा जाना है। अभिभावकों के बैंक खाते अपलोड किए जाने हैं, मगर प्रदेश भर में पोर्टल खराब चल रहा है, जिसकी वजह से खाता संख्या अपलोड नहीं हो सके हैं।
-- अंबरीश कुमार, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी।
गांधी पार्क स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय में बिना ड्रेस के पढाई करते छात्र छात्राएं- फोटो : SAHARANPUR