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पढ़ना, लिखना भूले बच्चे, शिक्षकों को करनी पड़ रही दोगुनी मेहनत

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डा दिव्य जैन - फोटो : SAHARANPUR
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सहारनपुर। करीब डेढ़ साल बाद स्कूल पहुंच रहे प्री-नर्सरी से आठवीं तक के विद्यार्थियों में कई बदलाव और कमियां देखने को मिल रहीं हैं। परिषदीय विद्यालयों के उन बच्चों की हालत अधिक खराब है, जो ऑनलाइन या मोहल्ला क्लास से नहीं जुड़ पाए। पब्लिक स्कूलों की ऑनलाइन कक्षाएं भी बच्चों को उनके स्तर पर बनाकर नहीं रख सकी हैं। ज्यादातर छोटे बच्चे अक्षरों को पहचानने में फेल साबित हो रहे हैं। जिन बच्चों को कभी 20 तक टेबिल यानी पहाड़े आते थे वह भी भूल गए हैं। लिखने की आदत छूटने की वजह से लिखते हुए जल्दी थक रहे हैं, साथ ही लेखन में भी खराबी आई है। पेश है शिक्षकों से बातचीत के आधार पर रिपोर्ट...
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- आशा मॉडर्न स्कूल के प्रधानाचार्य डॉ. दिव्य जैन ने बताया कि बच्चों की लिखने की आदत छूट गई है। अनुशासन में फर्क पड़ा है। आलसी और लापरवाह हुए हैं बच्चे। इसके अलावा अनेक बच्चों में मोटापा आ गया है।
- सहारनपुर पब्लिक स्कूल के प्रधानाचार्य सुधीर जोशी ने बताया कि बच्चे लिखना भूल गए हैं। अनेक बच्चों को अक्षरों को पहचानने में परेशानी हो रही है। अक्षरों का ज्ञान नहीं रहा है। कुछ बच्चे ऐसे हैं, जिन्हें काफी कुछ आता है और ज्यादातर ऐसे हैं जिन्हें कुछ भी नहीं आता।
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- रामपुर मनिहारान के बुड्ढाखेड़ा स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय सहायक अध्यापक राजकुमार चौधरी ने बताया कि ज्यादातर बच्चे खासकर छोटी कक्षाओं के बच्चे पढ़ाई में बिलकुल जीरो हो गए हैं। उन्हें शुरू से अक्षर ज्ञान कराना पड़ रहा है।
- सरसावा के गांव बुढेड़ा स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय के सहायक अध्यापक डॉ. अनिल बावरे ने बताया कि जो बच्चे ऑनलाइन कक्षाओं और मोहल्ला कक्षाओं से जुड़े रहे वह थोड़ा ठीक हैं। बाकी बच्चे पहले सीखा हुआ भी भूल गए हैं। इसके अलावा बच्चे लापरवाह हुए हैं।

डा अनिल बावेरे- फोटो : SAHARANPUR

राज कुमार चौधरी- फोटो : SAHARANPUR

सुधीर जोशी- फोटो : SAHARANPUR

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