छुटमलपुर। फतेहपुर थाना क्षेत्र के गंगाली गांव में खेलते समय 11 वर्षीय अंश पुत्र सुनील कार के अंदर बंद हो गया। कार लॉक होने के कारण वह खोल नहीं पाया और दम घुटने से उसकी मौत हो गई। पुलिस और फोरेंसिक टीम की प्रारंभिक जांच में सामने आया कि कार के शीशे बंद होने और तेज धूप के कारण गैस बनने से बच्चे की मौत हुई।
अंश गांव के ही जनहित पब्लिक स्कूल में पढ़ता था। बृहस्पतिवार दोपहर एक बजे वह स्कूल से आने के बाद खाना खाकर घर से खेलने निकल गया। दो दिन बाद उसकी बड़ी बहन का रिश्ता तय करने के लिए मेहमान आने वाले थे, जिसकी तैयारियां परिवार में चल रही थीं। सभी लोग उसमें व्यस्त थे। काफी देर तक जब अंश दिखाई नहीं दिया तो परिजनों ने उसकी तलाश शुरू कर दी। देर शाम तक नहीं मिलने पर थाने को सूचना दी गई। रात साढ़े नौ बजे तलाशी के दौरान अंश घेर में खड़ी कार में मृत अवस्था में मिला। उसका शरीर अकड़ चुका था।
इसके बाद फाेरेंसिक टीम बुलाई गई। जांच के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। शुक्रवार सुबह शव पहुंचा तो कोहराम मच गया। इसके बाद उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया। पुलिस ने बताया कि अंश खाना खाकर घर से निकलने के बाद कार में बैठ गया। इसी दौरान स्टेयरिंग आदि छेड़ने से कार लॉक हो गई होगी। बाहर तेज धूप थी, जिससे कार के अंदर गैस बनने से वह बेसुध हो गया होगा।
दो बहनों में इकलौता था अंश
अंश दो बहनों का इकलौता भाई था। काफी पहले सुनील के एक बेटे की मौत जन्म के कुछ दिन बाद ही हो गई थी। अब दूसरा बेटा भी चला गया। पिता गांव में परचून की दुकान और चक्की चलाते हैं। हादसे के बाद गांव में शोक व्याप्त है।
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यह बरतें सावधानी
- बच्चों को कभी भी कार में अकेला नहीं छोड़ना चाहिए। यह खतरनाक हो सकता है।
- कभी-कभी छोटे बच्चे कार में बैठे-बैठे चाबियों से खेलते हैं। ऐसे में कार लॉक हो सकती है। इसलिए बच्चों को कभी भी कार की चाबी नहीं दें।
- अगर बच्चे को कार में अकेला छोड़ते हैं तो कार के शीशे जरूर खुले रखें।
- जब आप कार में न हों तो उसे लॉक करके रखें और बच्चों को कार में घुसने न दें।
- कार से बाहर निकलते समय यह जरूर चेक करें कि उसमें आपका बच्चा तो नहीं है।
बच्चा कार में लॉक हो जाए तो क्या करें
- सबसे पहले कार के शीशे और बॉडी पर पानी डालें। ऐसा करने से कार के अंदर का तापमान सामान्य होगा।
- अगर बच्चा कार में फंसा है और दरवाजा खोलने का कोई उपाय नहीं है तो शीशे तोड़ने चाहिए।
- बाहर का तापमान 40 डिग्री है तो अंदर 70 डिग्री पहुंच जाएगा।
- जिस साइड बच्चा बैठा हो उससे दूसरी साइड का शीशा तोड़ें। धीरे-धीरे शीशा तोड़ें एकदम तोड़ेंगे तो बच्चे को चोट लगने का डर है।
- कार के अंदर तापमान बढ़ने से बच्चे की सांस फूलने लगती है। ऐसे में बच्चे को बाहर निकालकर तुरंत ठंडे तापमान में नहीं ले जाना चाहिए। बच्चे को ठंडा पानी भी नहीं पिलाना चाहिए।