सहारनपुर। पीएम आवास योजना में फर्जीवाड़े के मामले सामने आने के बाद विभाग ने व्यवस्था में बदलाव कर दिया है। शहर में होने वाली मकानों की जियो टैगिंग में अब खेल नहीं होगा। कंपनी की बजाय अब यह काम नगर निगम और डूडा के स्थायी कर्मचारियों से कराया जाएगा।
योजना के पहले चरण में नगरीय क्षेत्रों में करीब 35 हजार लोगों ने योजना का लाभ उठाया है। देखने में आया है कि योजना के संचालन के लिए शासन द्वारा हायर की गई कंपनी के कर्मचारियों की मिलीभगत से जियो टैगिंग में गड़बड़ी की गई है। एक ही मकान के सामने अलग-अलग लाभार्थियों को खड़ा कर जियो टैगिंग की गई और गलत तरीके से लोगों को लाभ दिलाया गया, लेकिन इस बार शासन ने कंपनी को हायर नहीं किया है। इस बार जियो टैगिंग की जिम्मेदारी डूडा और नगर निगम के स्थायी कर्मचारियों को दी गई है। नगर निगम से करीब 42 और डूडा से छह कर्मचारी इसके लिए नामित किए गए हैं। सरकार उन्हें प्रति जियो टैगिंग का अलग से पैसा देगी। यह कार्य अब सरकारी कर्मचारी करेंगे तो उम्मीद है कि वह गड़बड़ी नहीं करेंगे, क्योंकि गलती करने पर कार्रवाई का प्रावधान है।
दूसरे चरण में करीब 30 हजार लोगों ने आवास के लिए आवेदन किया है। इनमें से दस हजार से अधिक लोगों के खातों में पहली किस्त के 50-50 हजार रुपये भेजे जा चुके हैं। इन 50 हजार रुपये से नींव भराई का कार्य होना है। लाभार्थियों की दूसरी किस्त तभी जारी होगी, जब वह पहली किस्त के पैसे से नींव भराई का कार्य शर्तों के अनुरूप पूरा कर लेंगे। बता दें, कि पीएम आवास योजना में हुए फर्जीवाड़े की खबरों को अमर उजाला लगातार प्रकाशित कर रहा है। इसके बाद यह कदम उठाया गया।
डूडा ने बैठाई जांच, मकान स्वामी ने गोदाम बिकाऊ है पुतवाया
सहारनपुर। पीएम आवास योजना में मिले मकान को गोदाम बनाकर बेचने का मामला सामने आने के बाद विभाग ने जांच शुरू कर दी है। उधर, कार्रवाई से बचने के लिए मकान पर लिखे गए गोदाम बिकाऊ है को पुतवा दिया गया है। साथ ही शिलापट हटाकर मकान के सामने पौधा लगा दिया गया है, जिससे पहचान को छिपाया जा सके। मकान को गोदाम बनाकर बेचने का समाचार अमर उजाला ने सात मई के संस्करण में प्रमुखता के साथ प्रकाशित किया था। उसके बाद पीओ डूडा के द्वारा जांच बिठा दी गई। देखने में आया है कि जिस मकान पर लिखा गया था कि यह गोदाम बिकाऊ है। वह पुतवा दिया गया है। पहचान छिपाने के लिए बाहर पौधे लगा दिए गए हैं। पीएम आवास के शिलापट को ढकने के लिए लगाया गया लकड़ी का बोर्ड हटा दिया गया है। उसके नीचे से पीएम आवास योजना का शिलापट भी गायब है। उधर, समाचार के साथ पीएम आवास योजना में बने अन्य अधूरे मकानों की फोटो भी प्रकाशित की गई थी। वहां भी लोग रहने के लिए पहुंच गए हैं, जिससे किसी प्रकार की कार्रवाई से बचा जा सके।