सहारनपुर। कभी ढेवा समाज के परिवारों में बाल विवाह का चलन था, जिससे न केवल कानून का उल्लंघन हो रहा था, बल्कि बेटियों का भविष्य भी खराब हो रहा था। एक सामाजिक संस्था ने इस समाज के लोगों को जागृत किया और बाल विवाह के नुकसान समझाए तो, अब इस समाज के परिवार बाल विवाह के खिलाफ हो गए। संस्था की तरफ से हर साल ही इस समाज की बेटियों के सामूहिक विवाह भी कराए जा रहे हैं। मंगलवार को भी सामूहिक विवाह का आयोजन होगा।
शहर के लिंक रोड स्थित कांशीराम कॉलोनी और उसके आसपास ढेवा समाज की बस्ती है, जिसमें अनेक परिवार वर्षों से रह रहे हैं। इस समाज को जागृत करने वाली संस्था क्रेजी ग्रीन के अध्यक्ष अजय सिंघल ने बताया कि पांच साल में 36 बेटियों की शादी कराई हैं। जन सहयोग से प्रत्येक बेटी को शादी में डबल बेड और फ्रिज दिया जाता है। बाकी खर्च परिजन उठाते हैं। अब बस्ती के लोग पूरी तरह बाल विवाह के खिलाफ हैं और बेटियों की शादी 18 तथा बेटों की शादी 21 वर्ष पूरी होने के बाद ही कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस मुहिम में नितिन शर्मा, प्रतीक मणि त्रिपाठी, मुकुल मित्तल, संदीप शर्मा, रजत गोयल, शारित शर्मा, आदित्य मौर्य और बस्ती के प्रधान अशोक कुमार भी शामिल हैं।
आज होगी दस बेटियों की शादी
सामूहिक विवाह का अब पांचवां वर्ष है। 16 फरवरी को एक साथ दस बेटियों की शादी की जा रही है। पूरी बस्ती में टेंट लगाया गया है, जिसमें करीब साढ़े तीन हजार लोगों के भोजन की व्यवस्था रहेगी। जिस घर की बेटी की शादी होनी है, उनके दरवाजे पर मंडप सजेंगे।
पहले बड़ी बेटी की शादी के साथ छोटी बेटियों का भी गौना कर दिया जाता था, चाहे वह नाबालिग हो। मगर धीरे-धीरे लोगों को समझाना शुरू किया। पांच साल से बस्ती में कोई बाल विवाह नहीं हुआ। करीब 450 परिवार यहां रहते हैं और बाल विवाह के खिलाफ हैं। - अशोक कुमार, बस्ती के प्रधान।