फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सावधान ! आफत बन सकती हैं जर्जर इमारतें

विज्ञापन
सहारनपुर में लकड़ी बाजार स्थित जर्जर भवन - फोटो : SAHARANPUR
विज्ञापन
सावधान ! आफत बन सकती हैं जर्जर इमारतें
विज्ञापन

सहारनपुर। बरसात का सीजन चल रहा है। जर्जर भवनों के गिरने का खतरा बन आया है। जिलेभर में पहले से जर्जर भवन चिह्नित हैं, जिनमें बरसात के सीजन में रहना खतरे से खाली नहीं है। बावजूद इसके लोग जर्जर भवनों में रह रहे हैं। जिला प्रशासन ने सभी नगर निकायों के अधिशासी अधिकारियों को निर्देश दिया है कि जर्जर भवन चिह्नित कर उनमें रहने वालों को सचेत करें, ताकि जर्जर भवन गिरने पर जनहानि न होने पाए।
दरअसल, जर्जर भवन गिरने के कारण जनहानि की घटनाएं पूर्व में हो चुकी हैं। तीन वर्ष पूर्व रानी बाजार क्षेत्र में एक जर्जर भवन के गिरने से मां-बेटे की दबकर मौत हुई थी। हिरनमारान में जर्जर भवन के गिरने से तीन मजदूरों की दबकर मौत हो गई थी। इसके अलावा भी ऐसे कई हादसे हुए। महानगर में ही करीब 150 भवन जर्जर हैं, जिनमें सैकड़ों लोग रह रहे हैं।
विज्ञापन

नगर निगम ने करीब चार वर्ष पहले शहर के जर्जर भवनों को चिन्हित कराया था। ज्यादातर जर्जर भवन 100 वर्ष से अधिक पुराने हैं। अनेक नए भवन भी जर्जर पाए गए थे। खास बात यह है कि पिछले आठ से दस साल से गिर रहे जर्जर भवनों में ज्यादातर पुराने ही भवन शामिल हैं। नगर निगम ने भवनों को चिन्हित कराने के साथ ही इनमें रहने वाले परिवारों को भवन छोड़ने की हिदायत दी थी। नहीं छोड़ने पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई थी, मगर निगम की चेतावनी के बावजूद लोगों ने भवन नहीं छोड़े। अब फिर से बरसात शुरू हो चुकी है। पिछले चार दिन से हर दिन बारिश हो रही है, जिसने जर्जर भवनों में रह रहे परिवारों की टेंशन बढ़ी हुई है। अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) विनोद कुमार ने सभी निकायों और एसडीएम को पत्र भेजकर जर्जर भवनों को चिन्हित करने के निर्देश दिए हैं।
- कब्जा जमाए रखने के लिए नहीं छोड़ते भवन
नगर निगम ने चार साल पहले भवनों को चिन्हित करने के साथ ही उनमें रह रहे लोगों से बात की थी। ज्यादातर भवनों पर अधिकार का विवाद है। इसके अलावा कई भवनों का मामला कोर्ट में विचाराधीन है। यही वजह है कि जो लोग उनमें रह रहे हैं, वह कब्जा छोड़ना नहीं चाहते हैं। कोर्ट में मामला होने की वजह से ही नगर निगम भी ऐसे भवनों को छेड़ने से बच रहा है।
ढमोला नदी किनारे भी खतरा
जर्जर भवनों के साथ ही ढमोला नदी किनारे बसे लोगों को भी खतरा है। वर्ष 2013 में भारी बारिश की वजह से ढमोला नदी उफान पर आई थी। इसकी वजह से ढमोला किनारे बने अनेक मकान ढहकर पानी में बह गए थे। अनेक घरों में अचानक पानी आ जाने से जानमाल का नुकसान हुआ था। प्रशासन ने ढमोला नदी पर कब्जा कर बनाए गए मकानों को चिन्हित कराया था, जिनकी संख्या 250 से अधिक थी। मगर आज तक ढमोला नदी से कब्जे नहीं हटे हैं। ऐसे में बरसात में ढमोला किनारे बसे लोगों को भी खतरा है।
देहात की स्थिति
नगर पालिका नकुड़ के अधिशासी अधिकारी एसके सरोज ने बताया कि पूर्व में नगर में 19 जर्जर भवन चिह्नित किए गए थे, जिनमें से चार में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान बन गए हैं, बाकी 15 भवनों का निरीक्षण किया जाएगा। नगर पंचायत रामपुर मनिहारान में चार जर्जर भवन चिह्नित किए गए थे, जिनके मालिकों को नोटिस भेजे गए। नगर पंचायत अंबेहटा पीर में भी कई जर्जर भवन चिह्नित किए गए थे।
विज्ञापन

बरसात का मौसम शुरू हो चुका है। गत वर्षों में हुई जर्जर भवनों के गिरने की घटनाओं को ध्यान में रखते हुए सभी नगर निकायों के अधिशासी अधिकारी और एसडीएम को अपने क्षेत्रों में जर्जर भवनों को चिन्हित कराने का निर्देश दिया है। साथ ही उनमें रह रहे लोगों को सचेत करने को कहा गया है, ताकि दुर्घटना होने पर जान या माल का नुकसान ना होने पाए। - विनोद कुमार, अपर जिलाधिकारी, वित्त एवं राजस्व
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें