सहारनपुर। गन्ना विभाग ने गन्ना समितियों में स्थापित फार्म मशीनरी बैंक की क्षमता बढ़ाने की कवायद शुरू कर दी हैं। इसके तहत जिले की सभी गन्ना विकास समितियों में ट्रैक्टर सहित कृषि यंत्र बढ़ाए जाएंगे। इसके लिए कृषि विभाग की सब मिशन ऑन एग्रीकल्चर मैकेनाइजेशन (स्मैम) योजना का सहयोग लिया जाएगा। गन्ना विभाग ने इसके लिए प्रस्ताव भेज दिया है।
जिले की चार गन्ना विकास समितियों और दो चीनी मिल समितियों में फार्म मशीनरी बैंक स्थापित हैं। समितियां किसानों को किराए पर इन यंत्रों को उपलब्ध कराती हैं। इसमें हाइड्रोलिक रिवर्सेवुल एमबी प्लाऊ का 25 रुपये प्रति घंटा और मल्चर का 26 रुपये प्रति घंटा किराया है। रोटरी स्लेशर और जीरोटिल सीड कम फर्टिलाइजर ड्रिल को 9.50 रुपये प्रति घंटे की दर पर उपलब्ध कराया जाता है। गन्ना विभाग अब फार्म मशीनरी बैंक की क्षमता बढ़ाने की कवायद में जुट गया है। जिससे किसानों को किराए पर अधिक यंत्र उपलब्ध कराए जा सकें। इसके लिए सहकारी गन्ना विकास समितियों और चीनी मिल समितियों की ओर से प्रस्ताव भेजे गए हैं। इसमें कृषि विभाग की सब मिशन ऑन एग्रीकल्चर मैकेनाइजेशन (स्मैम) योजना सहयोग लिया जाएगा। इसके तहत फार्म मशीनरी बैंकों में 50 हॉर्सपावर का ट्रैक्टर, ट्रेस मल्चर, रोटावेटर, आटोमैटिक शुगर केन कटर प्लांटर, रेटून मैनेजमेंट डिवाइस, पावर टीलर, चीजलर, पॉवर स्प्रेयर और शामिल करने की योजना है।
-----------
-- फार्म मशीनरी बैंक में उपलब्ध यंत्र
समितियों में मल्चर छह एवं सात फीट, हाइड्रोलिक रिवर्सेवुल एमबी पलाऊ, रोटरी स्लेशर, जीरोटिल सीड कम फर्टिलाइजर ड्रिल हैं। इन यंत्रों की संख्या 38 है। इन यंत्रों को किसानों को किराए पर दिया जाता है। गत वर्ष जिले में किसानों ने 226.927 हेक्टेयर क्षेत्रफल में इन यंत्रों का प्रयोग किया।
वर्जन --
गन्ना विकास समितियों और चीनी मिल समितियों में स्थापित फार्म मशीनरी बैंकों की क्षमता बढ़ाई जाएगी। ट्रैक्टर सहित आठ और यंत्रों को शामिल किया जाएगा। जिससे किसानों को यंत्रों के लिए भटकना न पडे़। कृषि विभाग की अनुदान वाली सब मिशन ऑन एग्रीकल्चर मैकेनाइजेशन (स्मैम) योजना से इन यंत्रों की खरीदारी के लिए प्रस्ताव भेज दिया है।
-- कृष्ण मोहन मणि त्रिपाठी, जिला गन्ना अधिकारी