संवाद न्यूज एजेंसी
बेहट। आचार्य पंडित मुरारी झा ने कहा कि भद्रा के समय होलिका दहन करना शास्त्रों में निषेध बताया गया है। इसलिए भद्रा पूंछ में ही होलिका दहन करें। इस बार होलिका दहन के लिए दो व तीन मार्च की मध्य रात में 12:50 बजे से रात 02:02 बजे का समय ही श्रेष्ठ है। इससे पहले दहन करना समाज के लिए हानिकारक होता है।
उन्होंने बताया, कि वैसे तो होलिका दहन प्रदोष काल के समय होता है, लेकिन इस बार प्रदोष के समय भद्राकाल है और भद्रा के समय होलिका दहन निषेध माना गया है। भद्रा पूंछ में ही होलिका दहन शास्त्रोक्त शुभ माना जाएगा। रंगोत्सव होली चार मार्च को खेली जाएगी। भद्रा का समय दो मार्च की शाम 5:18 बजे से तीन मार्च प्रातः 4:56 बजे तक रहेगा। तीन मार्च को चंद्र ग्रहण भी रहेगा, जिसका सूतक प्रातः 6:20 बजे से शुरू होकर शाम 6:47 बजे तक रहेगा। ग्रहण का समय अपराह्न 3:20 बजे से 6:47 बजे तक रहेगा।
शास्त्रों में भद्रा के अंगों के शुभ व अशुभ फल
भद्रा मुख काल में कार्य हानि
कंठकाल में मृत्यु
वक्षकाल में निर्धनता
कटिकाल में पागलपन
नाभिकाल में पतन
पुच्छ काल में विजय (निश्चित सफलता)