सहारनपुर जिले के देवबंद क्षेत्र के खेड़ा मुगल गांव में शनिवार देर रात एक जलती मोमबत्ती ने मासूमों की जिंदगी खतरे में डाल दी है। जलती मोमबत्ती से रजाई में आग लगने के कारण हुए हादसे में सोते वक्त सात बच्चे झुलस गए। इनमें छह बच्चे एक ही परिवार के हैं, जबकि एक बालिका पड़ोस की है। हादसे के वक्त बच्चों के माता-पिता घर पर नहीं थे। रविवार को झुलसे बच्चों को जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया है। तीन बच्चों की हालत नाजुक बनी हुई है।
खेड़ा मुगल निवासी धर्मवीर अपनी पत्नी पिंकी के साथ शनिवार को दवा लेने के लिए रुड़की गए हुए थे। रात में दोनों वहीं पर रुक गए। उनके पीछे घर में शनिवार को छह बच्चों के पास दादी ही थी। उन्हें एक अलग कमरे में सुलाते हुए पड़ोस की 12 वर्षीय बच्ची काजल को भी उनके पास सुलाने को बुला लिया गया, ताकि रात में बच्चों को डर न लगे। बताया जाता है कि रात में कमरे में बेड और चारपाई के पास ही कानिस पर मोमबत्ती को जलता हुआ छोड़ दिया गया था। इसके बाद बच्चे गहरी नींद में सो गए।
रात 12.30 बजे के बाद कमरे से आग लगने और बच्चों के चीखने पर आसपास के कुछ लोग मौके पर पहुंचे, तो पता चला कि बच्चों की रजाई और चारपाई जल चुकी है। आग की चपेट में आकर बच्चे बुरी तरह झुलस चुके हैं। घटना की सूचना परिजनों को दी गई। रविवार सुबह झुलसे हुए सात बच्चों को जिला अस्पताल के बर्न वार्ड में भर्ती कराया गया। हादसे में झुलसे बच्चों में दो साल का मासूम प्रिंस, तीन वर्षीय वंश, दस वर्षीय प्रियंका, चार वर्षीय रीतिक, पांच वर्षीय रीतिका, आठ वर्षीय काजल और 12 वर्षीय बालिका काजल शामिल हैं। इनमें काजल, प्रियंका और रीतिका की हालत अधिक नाजुक बताई गई है। सभी बच्चों के चेहरे बुरी तरह झुलसे हुए हैं।
काजल चीखती रही पर बच्चे नहीं उठे
मोमबत्ती से हुए हादसे के दौरान कमरे में सो रही काजल और एक बच्चा चीखते रहे। हालांकि बच्चे गहरी नींद में सोने के कारण समय से नहीं उठ पाए। उनके उठने तक रजाई और चारपाई इतनी आग पकड़ चुकी थी कि सभी चपेट में आ गए।
घर आ जाते तो बच्चों पर ये आफत न टूटती
धर्मवीर और उसकी बीवी पिंकी इस बात का मलाल करते रहे कि वे अगर पहले ही घर लौट आते तो शायद बच्चों के साथ ऐसा हादसा न होता। झुलसने के बाद बच्चों की हालत ऐसी हो गई कि शुरू में तो उन्हें पहचान भी नहीं पाए।