Saharanpur News: गागलहेड़ी में बुधवार को बसपा के कार्यकर्ता सम्मेलन का आयोजन किया गया। पश्चिमी उत्तर प्रदेश प्रभारी मुनकाद अली ने फिरोज आफताब को प्रत्याशी बनाने का एलान किया। साथ ही कार्यकर्ताओं से चुनाव की तैयारियों में जुटने का आह्वान किया।
बसपा के पश्चिमी उत्तर प्रदेश प्रभारी मुनकाद अली ने सहारनपुर देहात विधानसभा सीट से फिरोज आफताब को प्रत्याशी घोषित किया है। गागलहेड़ी कस्बे के एक बैंक्वेट हॉल में बुधवार को आयोजित कार्यकर्ता सम्मेलन में उन्होंने कार्यकर्ताओं से 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटने और संगठन को मजबूत करने का आह्वान भी किया।
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सम्मेलन में उपस्थित लोग।
- फोटो : अमर उजाला
सम्मेलन में मुनकाद अली ने कहा कि बसपा शासनकाल में पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने सभी वर्गों को साथ लेकर प्रदेश में कानून व्यवस्था और विकास पर काम किया। उस दौरान प्रदेश में भाईचारे का माहौल रहा। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आपसी मतभेद भुलाकर बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने और पार्टी प्रत्याशी फिरोज आफताब को विजयी बनाने के लिए जुटने की अपील की। विश्वास जताया कि वर्ष 2027 में बसपा पूर्ण बहुमत की सरकार बनाएगी।
पार्टी के नेशनल को-ऑर्डिनेटर रणधीर सिंह बेनीवाल ने कहा कि बसपा शासन में दलित और मुस्लिम समाज को सम्मान मिला तथा युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए गए। उन्होंने कार्यकर्ताओं से गांव-गांव जाकर पार्टी की नीतियों को जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया।
सम्मेलन में मंडल प्रभारी विजय सिंह, नरेश गौतम, सरफराज राईन, जिलाध्यक्ष रजनीश बंधु, अनिल कुमार, सुनीष प्रधान, डॉ. धर्मेंद्र पेगवाल, रोहित राणा, नरेश सैनी आदि मौजूद रहे।
बारिश में दिखाया कार्यकर्ताओं का उत्साह
जिलाध्यक्ष रजनीश बंधु ने फिरोज आफताब को प्रत्याशी घोषित किए जाने की पुष्टि की। वहीं, बारिश के चलते कुछ समय के लिए आशंका जताई जा रही थी कि सम्मेलन में अपेक्षित भीड़ नहीं जुटेगी, लेकिन कार्यकर्ताओं का उत्साह खराब मौसम पर भारी पड़ा।
फिरोज आफताब को विरासत में मिली सियासत
बसपा द्वारा सहारनपुर देहात से प्रत्याशी घोषित किए गए फिरोज आफताब को सियासत विरासत में मिली है। उनके दादा जफर अहमद विधायक रह चुके हैं। उनके चाचा हाजी शमशाद बेहट क्षेत्र से विधायक रह चुके हैं। मूल रूप से गांव बुड्ढाखेड़ा के रहने वाले फिरोज आफताब राजनीति में 1996 से सक्रिय हैं। उन्होंने 1996 में निर्दलीय विधानसभा का चुनाव लड़ा। 2001 और 2007 में वह लोकदल के टिकट पर चुनाव लड़े। 2012 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़े। 2014 में सपा से लोकसभा का टिकट हो गया, लेकिन सात माह बाद कट गया था।