सहारनपुर। कोडिनयुक्त कफ सिरप का अवैध व्यापार सामने आने के बाद जिले के दवा बाजार पर खासा असर पड़ा है। दवा विक्रेता नई खेप मंगाने से कतरा रहे हैं। जिले में पहले हर महीने 10 से 12 लाख रुपये का कारोबार होता है। अब कारोबार का ग्राफ गिरकर पांच से छह लाख पहुंच गया है। यह गिरावट 50 प्रतिशत का है।
जिले में 350 से अधिक दवा की थोक दुकानें हैं। किशनपुरा दवा की मंडी है। यहां से अलग-अलग जिलों और कस्बों में दवा की सप्लाई होती है। जब से कोडिनयुक्त कफ सिरप की जालसाजी का खुलासा हुआ है और दवा विक्रेताओं पर प्राथमिकी हुई है, तब से खांसी की समस्या में दी जाने वाली कफ सिरप में फेंसेडिल नहीं दिख रहा है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग भी दवा विक्रेताओं से रिकॉर्ड मांग रहा है।
उसको लेकर भी दवा विक्रेता सकते में हैं। अवैध व्यापार में जिनका नाम सामने आया है, उन पर कार्रवाई तो हो रही है। अन्य कारोबारी भी डरे हुए हैं। यहीं वजह है कि कफ सिरप का नया स्टॉक नहीं मंगवा रहे हैं। पुराना स्टॉक निकालना मुश्किल हो रहा है।
जिले के छह लोग हो चुके गिरफ्तार : कोडिन युक्त कफ सिरप मामले में एसटीएफ ने 12 नवंबर को छापा मारकर विभोर राणा, उसके भाई विशाल सिंह, बिट्टू और सचिन को गिरफ्तार किया था। उनके बाद लखनऊ आलमबाग से सहारनपुर के अभिषेक व शुभम को एसटीएफ ने पकड़ा था। 12 व 13 दिसंबर को ईडी ने सहारनपुर पहुंचकर विभोर राणा के आवास व कार्यालय पर रिकॉर्ड खंगाला था।