सहारनपुर। तंबाकू उत्पाद शरीर को बहुत नुकसान पहुंचाते हैं। चिकित्सकों की मानें तो एक सिगरेट जिंदगी की छह मिनट कम कर देती है। इसके बावजूद समाज में तंबाकू के सेवन की प्रवृति तेजी से बढ़ी है।
फिजीशियन डॉ. संजीव मिगलानी ने बताया कि एक सिगरेट के भीतर 4000 तत्व होते हैं। जिनमें से 599 तत्व की लत पड़ जाती है। इनमें 500 तत्व शरीर को नुकसान पहुंचाते हैं। निकोटिन सबसे ज्यादा हानिकारक है। इससे कुछ समय के लिए उच्च रक्तचाप या धमनियों के सिकुड़ने की शिकायत हो सकती है।
छाती रोग विशेषज्ञ डॉ. समीर सिंघल ने बताया कि तंबाकू का सेवन करने वालों के जीवन की मियाद करीब दस साल कम हो जाती है। यदि 40 साल की उम्र से पहले तंबाकू का सेवन छोड़ दें तो करीब 90 फीसदी तक तंबाकू के दुष्प्रभावों को कम किया जा सकता है।
दंत रोग विशेषज्ञ डॉ. पंकज खन्ना ने बताया कि कई बार लोग उनके पास दांत संबंधी शिकायत लेकर आते हैं। पता चलता है कि उक्त व्यक्ति लंबे समय से तंबाकू उत्पाद का सेवन कर रहा है। ऐसे लोगों को विशेषज्ञ चिकित्सकों से मिलने की सलाह दी जाती है। प्रत्येक माह तीन से चार मामले ऐसे निकलते हैं।
तंबाकू से होने वाली बीमारियां
- फेफड़ों का कैंसर व अन्य बीमारी।
- दिल की बीमारी, हार्टअटैक आना।
- ब्लैडर और गले का कैंसर।
- खाने की नली का कैंसर।
- एसिडिटी का बढ़ना।
- गर्भवती महिलाओं का वजन कम होना, पेट में ही बच्चे की मृत्यु होना।
ढाई हजार लोगों ने छोड़ा तंबाकू का सेवन
जनपद में जून 2017 से चल रहा है राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम
संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। तंबाकू उत्पादों का विभिन्न रूप में सेवन शरीर पर गंभीर प्रभाव डालता है। ऐसे में लोगों को तंबाकू उत्पादों के प्रति जागरूक करने के लिए जनपद में चार साल से राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इसके माध्यम से काउंसलर ढाई हजार से अधिक लोगों की तंबाकू की लत छुड़वा चुके हैं, जबकि तीन हजार से अधिक लोगों ने तंबाकू का सेवन कम किया है।
जिला सलाहकार मुदस्सर अली ने बताया कि राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम जनपद में जून 2017 से चल रहा है। इसके तहत टीमें सभी सीएचसी, पीएचसी समेत सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों के अतिरिक्त गांवों में शिविर लगाती हैं। जिनमें लोगों को तंबाकू उत्पादों का सेवन करने के नुकसान समझा कर छोड़ने की सलाह दी जाती है। हर साल 50 से अधिक शिविर लगाए जाते हैं। तंबाकू का सेवन करने वालों की काउंसिलिंग की जाती है। जिसमें कुछ लोग तंबाकू छोड़ने को तैयार हो जाते हैं।
बीते चार साल में करीब 15 हजार लोगों की काउंसिलिंग की गई है। जिनमें से करीब 4500 लोग काउंसिलिंग के बाद संपर्क से बाहर हो गए। ढाई हजार से अधिक लोग ऐसे रहे हैं। जिन्होंने तंबाकू उत्पादों का सेवन बंद कर दिया है। तीन हजार से अधिक लोग ऐसे रहे हैं, जिन्होंने सेवन काफी कम किया है। वहीं, कुछ लोग छोड़ने के कगार पर हैं। उन्होंने बताया कि इस बार कोरोना की वजह से शिविर नहीं लग पा रहे हैं। यदि पुलिस व शिक्षा विभाग समेत विभिन्न विभागों के सहयोग से नियंत्रण किया जा रहा है।