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निकाय सीधे शासन को भेज सकेंगे सीमा विस्तार का प्रस्ताव

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सहारनपुर। नगर पालिका और नगर पंचायतों के सीमा विस्तार के मानक में शासन ने बदलाव कर दिया है। पूर्व में नगर निकाय के बोर्ड में प्रस्ताव पारित होने के साथ ही जिलाधिकारी की संस्तुति भी आवश्यक होती थी, लेकिन अब इनमें से किसी एक प्रक्रिया को पूरी करके ही शासन को सीमा विस्तार का प्रस्ताव भेजा जा सकेगा। इसके उन निकायों को फायदा मिलेगा, जहां राजनीति प्रतिद्वंद्विता के कारण सीमा विस्तार के प्रस्ताव फंस जाते थे।
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इस संबंध में प्रमुख सचिव दीपक कुमार ने प्रदेश के सभी मंडलायुक्त और जिलाधिकारियों को पत्र भेजा है। उसमें संशोधित मानक और पूर्व में प्रयोग किए जा रहे मानकों का उल्लेख भी किया है। पूर्व में सीमा विस्तार के लिए निकाय के बोर्ड द्वारा प्रस्ताव पारित करना होता था, जिसके बाद जिलाधिकारी की संस्तुति होती थी। संशोधित मानक के अनुसार इन दोनों में से किसी एक ही प्रक्रिया को अपनाया जा सकता है। इन्हीं मानक के अनुसार निकायों के सीमा विस्तार का प्रस्ताव भेजने को कहा गया है।
बेहट को जल्द मिल सकता है लाभ
जिले में चार नगर पालिका देवबंद, नकुड़, सरसावा और गंगोह शामिल हैं, जबकि नानौता, रामपुर मनिहारान, अम्बेहटा, तीतरो, सुल्तानपुर चिलकाना और बेहट नगर पंचायतें हैं। इनमें से बेहट नगर पंचायत के सीमा विस्तार का प्रस्ताव पूर्व में भेजा गया था, लेकिन वह मंजूर नहीं हो पाया। उम्मीद है कि बेहट नगर पंचायत के सीमा विस्तार पर जल्द ही शासन की मुहर लगेगी। नगर पंचायत बेहट के चेयरमैन अब्दुलरहमान का कहना है कि बसपा सरकार में सीमा विस्तार का प्रस्ताव भेजा था, लेकिन प्रस्ताव अधर में लटक गया था। उम्मीद है कि जल्द ही नगर पंचायत के सीमा विस्तार को हरी झंडी मिल जाएगी।
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चिलकाना नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी जितेंद्र राणा ने बताया कि कुछ ऐसे स्थान हैं, जिन्हें नगर पंचायत की सीमा में लाया जा सकता है। इसके लिए शीघ्र बैठक कर प्रस्ताव रखा जाएगा तथा सीमा विस्तार के लिए शासन को भेजा जाएगा। वहीं, नगर पालिका नकुड़ चेयरमैन शाहनवाज खान ने बताया कि नियम बदलने का लाभ मिलेगा, अगली बोर्ड बैठक में सीमा विस्तार का प्रस्ताव रखा जाएगा।
ग्राम सभा देहात की प्रधान सुनीता चौधरी के प्रतिनिधि जसबीर चौधरी का कहना है कि जब से ग्राम सभा का नगर पंचायत रामपुर मनिहारान में विलय हुआ है, सफाई व्यवस्था पूरी तरह से चौपट हो गई है। विकास कार्य ठप हैं, ग्रामीण खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं।
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