सहारनपुर। ब्लैक फंगस ने जनपद में दस्तक दे दी है। अभी तक कई संदिग्ध मामले सामने आ चुके हैं, जिन्हें मेरठ रेफर किया गया है। कई मरीज यमुनानगर में इलाज करा रहे हैं, जिनमें से एक मरीज की आंख तक निकालनी पड़ी है। मगर चिकित्सा विभाग अभी तक सोया है। ब्लैक फंगस के इलाज के लिए विभाग के पास न तो दवा है और न ही वार्ड तैयार किया गया है।
ब्लैक फंगस को लेकर सरकार भी लगातार दिशा निर्देश जारी कर रही है। मरीजों के लिए अलग से वार्ड बनाने को कहा गया है, मगर हकीकत यह है कि ब्लैक फंगस से निपटने के लिए चिकित्सा विभाग के पास कोई तैयारी नहीं है। विभाग के उच्चाधिकारी चार बेड का वार्ड तैयार कर दिए जाने का दावा कर रहे हैं, जबकि हकीकत यह है कि अभी तक कोई वार्ड तैयार नहीं किया गया है।
बीते तीन दिन में कई संदिग्ध मरीज एसबीडी जिला अस्पताल की इमरजेंसी में पहुंचे हैं, जिनमें से कई को जांच और इलाज के लिए मेरठ रेफर किया गया है। ब्लैक फंगस के मरीजों के इलाज के लिए चार दिन पहले शासन से दवा की मांग की गई थी। मगर अभी तक दवा जनपद में नहीं पहुंची है। ऐसी स्थिति में विभाग के पास मरीजों को रेफर करने के अलावा कोई और चारा नहीं है।
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यहां मिले मरीज
जनपद में अभी तक ब्लैक फंगस के जो मरीज सामने आए हैं। इनमें सरसावा के गांव भिक्कनपुर निवासी मरीज का यमुनानगर के जिंदल हॉस्पिटल में इलाज चल रहा है। शहर के वार्ड 39 निवासी एक व्यक्ति का यमुनानगर में इलाज चला और आंख निकालनी पड़ी। गांव दाबकी जुनारदार की महिला को मेरठ रेफर किया गया। इसी तरह अंबेहटा निवासी महिला को भी संदिग्ध मानते हुए रेफर किया गया। इनके अलावा एक और मरीज मिला था।
----- वर्जन
ब्लैक फंगस के लिए मेडिकल कॉलेज में वार्ड बनेगा। एसबीडी जिला अस्पताल में कुछ बेड आरक्षित हैं, वार्ड की व्यवस्था भी कराई जाएगी। एम्फोटायरेसिन इंजेक्शन और टेबलेट मंगाई जा रही हैं। -- डॉ. बीएस सोढ़ी. जिला मुख्य चिकित्साधिकारी