सहारनपुर। दुनिया भर के लिए समस्या बन रहा बायोमेडिकल वेस्ट कोरोना काल में कम हो गया है। सहारनपुर से सामान्य दिनों में जहां प्रतिदिन 350 किलोग्राम से अधिक बायोमेडिकल वेस्ट निकलता था, अब वह घटकर 250 किलोग्राम तक रह गया है।
मेरठ की सिनर्जी कंपनी सहारनपुर से सभी सरकारी और गैर सरकारी अस्पतालों से बायोमेडिकल वेस्ट उठाती है। कंपनी के कर्मचारी प्रतिदिन गाड़ियों में लादकर बायोमेडिकल वेस्ट को मेरठ ले जाते हैं, जहां उक्त कचरे का निस्तारण किया जाता है। सामान्य दिनों में सहारनपुर से प्रतिदिन 350 किलोग्राम या कई बार उससे अधिक बायोमेडिकल वेस्ट निकलता था, मगर कोरोना काल में इसमें 100 किलोग्राम प्रतिदिन तक की कमी आई है। इस हिसाब से महीने में तीन हजार किलोग्राम यानी 30 क्विंटल तक बायोमेडिकल वेस्ट कम हुआ है। बायोमेडिकल वेस्ट में अब सर्जिकल बायोमेडिकल वेस्ट न के बराबर हुआ है। 90 फीसदी बायोमेडिकल वेस्ट कोरोना से जुड़ा है, जिसमें पीपीई किट, ग्लब्स, मास्क आदि शामिल हैं।
ये हैं कारण
- कोरोना की दूसरी लहर में सरकारी अस्पतालों में सर्जरी बंद रहीं।
- अधिकांश बायो मेडिकल वेस्ट सर्जरी से ही निकलता था।
- निजी अस्पतालों में भी ऑपरेशन की संख्या काफी कम हुई।
- वाहनों का आवागमन कम होने से हादसे भी कम हुए हैं।
सहारनपुर से प्रतिदिन 350 किलोग्राम तक बायोमेडिकल वेस्ट मेरठ ले जाया जाता था, मगर कोरोना की दूसरी लहर में इसकी मात्रा घटकर 250 किलोग्राम प्रतिदिन तक हुई है। यानी 100 किलोग्राम तक बायो मेडिकल वेस्ट कम हुआ है। इसमें ज्यादातर कचरा कोविड अस्पतालों से जुड़ा है।
- संजय कौशिक, सीईओ, सिनर्जी।