सहारनपुर। जिले में नैपियर घास, गोबर, चीनी मिलों की मैली और पराली आदि फसल अवशेषों का प्रयोग कर बायो सीएनजी, जैव कोयला और जैविक खाद बनाई जाएगी। इसके लिए ग्राम इस्सापुर में एक इकाई स्थापित की जा रही है। कंपनी किसानों से नैपियर घास की अनुबंध खेती कराएगी। इस इकाई के मई-जून तक चलने की संभावना है।
जनपद में जल्द ही फसल अवशेषों से बायो सीएनजी, जैव कोयला और जैविक खाद बनाने वाली इकाई शुरू हो जाएगी। इससे जहां फसल अवशेषों को जलाने से पैदा होने वाले प्रदूषण से राहत मिलेगी, वहीं किसान फसल अवशेषों को बेचकर आमदनी प्राप्त कर सकेंगे। इकाई में बायो सीएनजी, जैव कोयला और जैविक खाद तैयार किए जाएंगे। जैविक खाद रसायनिक डीएपी, एनपीके और पोटाश के जैविक विकल्प होगा। सेवाेजोन एनर्जी एवं फर्टिलाइजर कंपनी के निदेशक जैविल राणा एवं अमित राणा ने बताया कि उनकी इकाई मई-जून में शुरू हो जाएगी। इस इकाई में तैयार बायो सीएनजी की बिक्री सरकारी पेट्रोलियम कंपनी को होगी। जैव कोयले को नेशनल थर्मल पॉवर कारपोरेशन और जैविक खाद को किसानों को बेचा जाएगा। यह खाद अपेक्षाकृत सस्ती होने के साथ ही मृदा स्वास्थ्य के लिए भी बेहतर होगी।
800 रुपये टन खरीदी जाएगी नैपियर घास
ग्राम इस्सापुर में निर्माणाधीन इकाई को रोजाना 120 टन से अधिक नैपियर घास, फसल अवशेष, शुगर मिल की मैली और गोबर आदि की जरूरत होगी। इसे पूरा करने के लिए किसानों से 800 रुपये प्रति टन के हिसाब से नैपियर घास खरीदी जाएगी। नैपियर घास की खेती के लिए किसानों से अनुबंध किया जाएगा। कंपनी नैपियर घास को खेत से काटने के लिए ब्राजील से एक मशीन का आयात भी कर रही है।
ग्राम इस्सापुर में फसल अवशेष से बायो सीएनजी, जैव कोयला एवं जैविक खाद तैयार करने वाली इकाई शुरू होने का लाभ उद्योगों के साथ क्षेत्र के किसानों को भी होगा। इकाई नैपियर घास के लिए किसानों से अनुबंध करेगी। जिससे किसानों को अच्छी आय प्राप्त होगी। - वीके कौशल, उपायुक्त उद्योग