उन्होंने कहा कि वर्तमान में आरोपी पुलिस की हिरासत में हैं और मुकदमे की अगली सुनवाई पर आरोपियों के बचाव में एडवोकेट फुरकान अदालत में उपस्थित रहेंगे। गुलजार आजमी ने कहा कि लखनऊ के प्रसिद्ध और वरिष्ठ एडवोकेट मुहम्मद शुऐब ने भी जमीयत उलमा से आरोपियों का मुक़दमा लड़ने का अनुरोध किया था।
वहीं मौलाना सैयद अरशद मदनी ने कहा कि जमीयत के प्रयासों से अब तक सैकड़ों युवक आतंकवाद के मुकदमो में रिहा हो चुके हैं, जो यह प्रमाणित करता है कि जांच एजेंसियां बिना सबूत के धार्मिक पक्षपात के आधार पर उन्हें गिरफ्तार कर लेती हैं और एक लंबे समय के बाद अदालतें उन्हें सम्मानजनक बरी कर देती हैं, लेकिन प्रश्न यह है कि जांच एजेंसियों के इस पक्षपातपूर्ण रवैये से मुस्लिम युवकों के जो साल बर्बाद हो जाते हैं उन्हें कौन लौटाएगा? इसीलिये जमीयत उलमा ने फास्टट्रैक अदालत की मांग की थी, ताकि जल्द ट्रायल हो। कहा कि यदि वे वास्तव में दोषी हैं तो सज़ा मिले अगर निर्दोष हैं तो उन्हें रिहा कर दिया जाए।
मुस्लिम युवाओं के जीवन को तबाह करने के लिए आतंकवाद को एक हथियार के रूप में प्रयोग करने का सिलसिला लगातार जारी है निर्दोष मुसलमानों की सम्मानजनक रिहाई तक हमारा कानूनी संघर्ष जारी रहेगा। -मौलाना अरशद मदनी, राष्ट्रीय अध्यक्ष, जमीयत उलमा ए हिंद
बता दें कि लखनऊ में एटीएस ने आतंकी मिनहाज अहमद और मसीरुद्दीन उर्फ मुशीर को गिरफ्तार किया था। आतंकियों ने खुलासा किया है कि वह 15 अगस्त को धमाके करने वाले थे। हालांकि एटीएस ने ये खुलासा नहीं किया कि ये आतंकी धमाके किन स्थानों पर करने वाले थे।
सूत्रों के मुताबिक आतंकियों का दिल्ली कनेक्शन पाया गया है। आशंका है कि मिनहाज व मुशीर या फिर इनसे जुड़े आतंकी दिल्ली में भी किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की फिराक में थे लेकिन एटीएस ने उनके मंसूबों पर पानी फेर दिया।
वहीं इस मामले में एटीएस ने लखनऊ से तीन और संदिग्ध लोगों को गिरफ्तार किया है। बताया गया है कि इनमें से एक आरोपी मोहम्मद मुस्तकीम मुजफ्फरनगर जनपद के तितावी थाना क्षेत्र के गांव मांडी का मूल निवासी है। जाहिर है आरोपी मुस्तकीम की कुंडली खंगालने एटीएस जल्द ही मुजफ्फरनगर जांच के लिए आ सकती है।