सहारनपुर। देश छोड़कर पाकिस्तान बस गए लोगों से जुड़ी बेशकीमती संपत्तियों की वर्तमान स्थिति की जानकारी शासन को भेजी जाएगी। इसके लिए रिपोर्ट तैयार की जा रही है। जिले में बेहट क्षेत्र में सबसे अधिक शत्रु संपत्ति है। कहीं पर खाली जमीन है तो कहीं पर मकान बने हुए हैं।
शासन के निर्देशों के बाद ऐसी संपत्तियों का सर्वे कराया गया है। अभी तक 73 से अधिक संपत्ति चिह्नित हैं। इसके बाद भी अलग-अलग शिकायतों के आधार पर समय-समय पर जांच और सत्यापन होता रहा है। अब शासन स्तर से इनके निस्तारण और उनकी नीलामी की तैयारी शुरू की जा रही है। इसके लिए मौके की स्थिति, क्षेत्रफल, कब्जा, वर्तमान में उपयोग समेत अन्य स्थिति की जानकारी शासन को भेजी जाएगी। यह जानकारी 15 दिनों में शासन को भेजनी है। साथ ही देवबंद में क्षेत्र में शत्रु संपत्ति पर कब्जे को लेकर कर्मियों पर गाज भी गिर चुकी है। वर्ष 1989 में पाकिस्तान जा चुकी साहिला खातून के नाम दर्ज संपत्ति पर कब्जे के मामले में पुलिसकर्मी को निलंबित किया जा चुका है। इसी तरह अन्य कई मामलों में भी कार्रवाई की गई है।
इसे कहते हैं शत्रु संपत्ति
शत्रु संपत्ति उन लोगों की चल और अचल संपत्ति को कहा जाता है, जो भारत-चीन युद्ध (1962) और भारत पाकिस्तान युद्ध (1965,1971) के समय भारत छोड़कर पाकिस्तान या चीन चले गए। साथ ही वहां की नागरिकता भी प्राप्त कर ली। शत्रु संपत्ति अधिनियम के तहत यह संपत्तियां सरकार के नियंत्रण में आती हैं।
जिले में स्थित शत्रु संपत्ति
- सदर तहसील में हजरत बेगम, लोहानी सराय सात संपत्ति, असगर हुसैन मोहल्ला अंसारियान दो संपत्ति, शरीफ उर्फ लुहारी सड़क दुधली चार संपत्ति, मजदीन सड़क दुधली तीन संपत्ति आदि।
- देवबंद तहसील में मेहरबान, बनहेडा खास दो संपत्ति, मकसूद बनहेडा खास, मोहम्मद अहतशाम आठ संपत्ति आदि।
- बेहट तहसील में खालदा बेगम आलमपुर तीन संपत्ति, इजहार अहमद समसपुर दो संपत्ति, खुर्शीद आलम शमसपुर दो संपत्ति, असलम शमसपुर चार संपत्ति, खुर्शीद आलम एक संपत्ति, महमूद अली वाजिदपुर एक संपत्ति, सुखा भिक्खनपुर एक संपत्ति, केसर अली पांच संपत्ति खुज्नावर, इरशाद खुजनावर एक संपत्ति, जलील दो संपत्ति, नवाब अली चार संपत्ति, इफ्तार शेखुपुर खानजादा एक संपत्ति, अली बहादुर आठ संपत्ति शेखुपुर कंडेल, अली बहादुर फक्खरपुर आठ संपत्ति, अक्षरी एक संपत्ति आदि।
शत्रु संपत्ति को लेकर नियमित सत्यापन कराया जाता है। यदि कोई शिकायत आती है तो उसका सत्यापन कर निस्तारण किया जाता है। इनकी रिपोर्ट भी शासन को भेजी जाती है। संपत्तियों को लेकर शासन से जो भी निर्देश प्राप्त होंगे। उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
- सलिल कुमार पटेल, अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व।