लखनौती/गंगोह (सहारनपुर)। खादर क्षेत्र के अति संवेदनशील गांव कुंडाकला में एक नवजात बच्ची की बुखार आने के बाद मौत हो गई। ग्रामीणों में बुखार को लेकर दहशत का माहौल है।
अब क्षेत्र में तीन मासूमों सहित 8 लोग बुखार आने के बाद मौत का शिकार हो चुके हैं। चौसाना निवासी दिलशाना पत्नी मोहसीन गांव कुंडाकला में अपने मायके आई हुई है।
करीब पांच दिन पूर्व उसने एक बच्ची को जन्म दिया था। दो दिन से बच्ची को बुखार आ रहा था। परिजन गांव में ही उसका उपचार करा रहे थे। आराम ना आने पर उसे गंगोह में निजी चिकित्सक को दिखाया गया। परंतु बृहस्पतिवार को बच्ची की मौत हो गई।
इसके साथ ही पांच दिन के भीतर गांव कुंडाकलां में तीन मासूमों सहित पांच लोग बुखार की भेंट चढ़ चुके है। जबकि क्षेत्र में बुखार आने के बाद मरने वालों की संख्या 8 हो गई है।
उधर, सोशल डैमोक्रेटिक पार्टी आफ इंडिया के प्रदेश सचिव हाफिज रागिब रशीदी ने सीएमओ को पत्र लिखकर गांव स्थित पीएचसी में सप्ताह भर चिकित्सक की तैनाती करने, कारगर एंटी लारवा दवाई का छिड़काव कराने और मरीज के ब्लड टैस्ट के बाद उसकी जांच रिपोर्ट मरीज तक पहुंचाने की मांग की है।
पत्र में मांगे शीघ्र पूरी न किए जाने पर आंदोलन की चेतावनी दी गई है। सीएचसी प्रभारी डा. अनवर अंसारी ने नवजात की मौत से अनभिज्ञता जताई है।
जिला अस्पताल में 12 घंटे में पहुंच रहे 50 से अधिक मरीज
बुखार का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। आलम यह है कि जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में पहुंच रहे बुखार के मरीजों का आना जारी है। पिछले 12 घंटे में बुखार के 50 से अधिक मरीज पहुंचे हैं। बावजूद इसके स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई विशेष कदम अभी तक नहीं उठाए जा रहे हैं।
बरसात के बाद मलेरिया, डेेंगू और अन्य प्रकार के बुखार होने का खतरा रहता है। कई बार यह बीमारी महामारी का रूप ले चुकी है। पिछले कुछ दिन से बुखार के मरीजों की संख्या में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। बुधवार की रात 12 बजे से बृहस्पतिवार की दोपहर 12 बजे तक 50 से अधिक बुखार के मरीज इमरजेंसी वार्ड में पहुंच चुके थे। डॉ. गजेंद्र सिंह ने बताया कि इमरजेंसी में मरीजों को हर संभव सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।
उनकी सलाह है कि कोई भी मरीज बुखार को हल्के में न ले। सबसे पहले अपने नजदीकी सरकारी अस्पताल जाए। इसके अलावा अपने खून की जांच कराए, जिससे समय से पता चल सके कि बीमारी क्या है।