सहारनपुर। कोरोना काल ऑटोमोबाइल सेक्टर पर भी भारी पड़ रहा है। कोरोना कर्फ्यू तो हट गया लेकिन बाइक, स्कूटर और कार की बिक्री ने गति नहीं पकड़ी है। सामान्य दिनों में जनपद भर में 3500 से 4000 दो पहिया वाहन और करीब 200 कारें प्रति माह की बिक्री हो जाती थी। जबकि अब एजेंसियों पर इक्का दुक्का ग्राहक ही आ रहे हैं। ऐसे में इस क्षेत्र के कारोबारियों को आर्थिक पैकेज की दरकार है। जनपद में दो पहिया वाहनों की 12 और कारों की छह एजेंसियां हैं।
आर्थिक पैकेज मिले
कोरोना कर्फ्यू के दौरान कारोबार तो बंद रहा लेकिन खर्चें लगातार रहे। सभी एजेंसी वाले बैंक से ऋण लेकर अपने यहां स्टॉक रखते हैं। जिसे बैंक को 45 दिनों में ब्याज सहित वापस करना होता है। वाहनों की बिक्री नहीं हो रही है। सरकार को आर्थिक पैकेज देना चाहिए। --- निपुण जैन, ऑटोमोबाइल कारोबारी।
बैंक का ब्याज माफ हो
कोरोना कर्फ्यू की अवधि का बैंक ब्याज माफ किया जाए। इस दौरान शोरूम नहीं खुले। लोन पर बैैंक का ब्याज चढ़ गया है। अभी भी वाहनों की बिक्री नहीं हो रही है। -- अजय वर्मा, ऑटोमोबाइल कारोबारी।
जीएसटी की दर कम हो
ऑटोमोबाइल कारोबार पर कोरोना काल का विपरीत प्रभाव पड़ा है। इसका असर वाहनों की बिक्री पर पड़ रहा है। सरकार वाहनों पर जीएसटी की दर को कम करके इस क्षेत्र की मंदी को दूर कर सकती है। -- अनुज आर्य, ऑटोमोबाइल कारोबारी।
टैक्सों की दर कम हों
टू व्हीलर कारोबार को गति देने के लिए कंपनी तो स्कीम लाने पर विचार कर रही है, लेकिन सरकार को भी इस दिशा में सोचना चाहिए। वाहनों पर लगने वाले जीएसटी, रोड टैक्स आदि की दर कम करके इस सेक्टर को सहारा दिया जाए।-- हरवीर सिंह बावा, ऑटोमोबाइल कारोबारी।