सहारनपुर। उत्तर प्रदेश में फिल्म सिटी बनाने की कवायद के बीच सहारनपुर शहर के उन स्थलों के भी दिन बहुरने की उम्मीद है, जो प्राचीन हैं और दर्शनीय भी तथा पर्यटन के लिहाज से भी खास हैं। इन स्थलों से स्वतंत्रता संग्राम की यादें जुड़ी हैं तो मुगलकाल से लेकर अंग्रेजों के शासन तक खूबसूरती का गवाही भी है। भविष्य में जब यूपी में फिल्म सिटी की स्थापना हो जाएगी तो संभव है कि यहां पर भी फिल्म शूटिंग हो सकेगी। पेश है सहारनपुर शहर के इन स्थलों पर आधारित रिपोर्ट...
कंपनी गार्डन
कंपनी बाग की स्थापना मुगल शासन काल में हुई। इसे शाही आनंद गृह के नाम से भी जाना जाता था। सन 1750 से पहले इंतिजामुद्दौला इसके संस्थापक माने जाते हैं। इसका नाम रखा गया था फरहत बख्श यानी आनंद देने वाला। 1786 में गुलाम कादिर ने इस उद्यान का जीर्णोद्धार कराया। बाद में उद्यान की बागडोर ईस्ट इंडिया कंपनी ने संभाली इसे कंपनी गार्डन नाम देकर यहां औषधीय, शोभनीय और अन्य उपयोगी पौधे लगाए। यह वही उद्यान है, जहां डॉ. गोवान, डथी, रोयले, हार्टलेस और फ्यूचर जैसे महान वनस्पति शास्त्रियों ने बहुमूल्य समय बिताया और वनस्पति विज्ञान में शोध कार्य किया। उद्यान में आर्थिक वनस्पति विज्ञान के व्यवहारिक शोध और विकास कार्यों में भूमिका निभाई जाती रही है।
-- रोहिला वंश का किला
देहरादून रोड पर रोहिला वंश का किला है, जिसमें वर्तमान में जिला कारागार संचालित हो रहा है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई) ने इसे संरक्षित स्मारक भी घोषित किया हुआ है। मुख्य गेट के पास से ही किले की दीवारें दिखती हैं। जिला कारागार स्थानांतरित करने की प्रक्रिया भी चल रही है और जेल का निर्माण कराने के लिए जमीन तलाशी जा रही है। नए स्थान पर जेल बनने पर यह किला खाली कर दिया जाएगा। भविष्य में जब यूपी में फिल्म सिटी बन जाएगी तो यह स्थल भी शूटिंग के लिहाज से उपयुक्त मानी जाएगी।
-- फुलवारी आश्रम
बाबा लालदास के बाड़ा स्वतंत्रता संग्राम की यादें संजोए हुए हैं। क्योंकि सरदार भगत सिंह भी यहां आकर कई बार रुके थे। लालदास के बाड़े में ही फुलवारी आश्रम है, जहां से 1930 में नमक सत्याग्रह की शुरुआत की गई थी। अन्य भी बहुत सी यादें इस स्थल से जुड़ी हुई हैं, जो लोगों को आकर्षित करती हैं।