- कुषाणकालीन, सिंधुकालीन सभ्यता के मिलते हैं प्रमाण
अमर उजाला ब्यूरो
सहारनपुर। आज विश्व पर्यटन दिवस है। सहारनपुर जिले में पर्यटन के लिहाज से बहुत से स्थल है, जो प्राचीन हैं। उत्तर प्रदेश में फिल्म सिटी की स्थापना को लेकर कवायद चल रही है। जो फिल्म शूटिंग के लिए अच्छे स्थल हो सकते हैं। सहारनपुर शहर ही नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्र में भी ऐसी कई धरोहर हैं, जो अविस्मरणीय और अद्भुत हैं। देवबंद से लेकर सरसावा और गंगोह से नकुड़ क्षेत्र में ऐसे बहुत से स्थल है। पेश है ग्रामीण क्षेत्र में पौराणिक और पर्यटन के प्रमुख स्थलों पर आधारित रिपोर्ट...
मां बाला सुंदरी मंदिर और देवी कुंड
कस्बा देवबंद में मां बाला सुंदरी का प्राचीन मंदिर है। यह पश्चिमी उत्तर प्रदेश के श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। पर्यटन की दृष्टि से बेहद खास है। क्योंकि मंदिर परिसर में ही देवी कुंड भी यहां है। देवी कुंड और इस मंदिर को लेकर तमाम किवदंती भी जुड़ी हुई हैं।
सिंधुकालीन सभ्यता का हुलास स्थल
गंगोह - तीतरो मार्ग पर गांव मनोहरा के पास हुलास टीला है। यह सिंधु कालीन सभ्यता से जुड़ा बताया जाता है। यहां वर्ष 1978-79 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की टीम ने खुदाई करायी थी। खोदाई में यहां पर सिल बट्टे, मिट्टी के बर्तन और अन्य अवशेष निकले थे। प्राचीन मकानों की नींव, मिट्टी के फर्श और खंभे गाड़ने को बनाए गड्ढे भी मिले थे। माना गया था कि 3500 साल पूर्व सिंधु कालीन सभ्यता के दौरान यहां लोग निवास करते होंगे।
खुजनावर का कुषाणकालीन टीला
छुटमलपुर क्षेत्र के गांव खुजनावर में कुषाणकालीन टीला है। करीब 2000 साल पुराना बताया जाता है। फिलहाल टीले पर ही गांव बसा है। गांव के ठीक पीछे चचाराव नदी बहती है। जिसके बीच में प्राचीन कुएं के अवशेष भी मौजूद हैं।
सरसवा का सिंधुकालीन टीला
अंबाला हाइवे पर कस्बा सरसावा में ही प्राचीन टीला है। यह 1500 साल पुराना सिंधुकालीन बताया जाता है। राज्य पुरातत्व विभाग ने इसके संरक्षण की बात कही और पूर्व में यहां तारबाड़ भी लगाई गई।
महाभारत और मुगलकालीन धरोहर
- नकुलेश्वर महादेव मंदिर नकुड़
- बरसी का महादेव मंदिर तीतरो
- वनखंडी महादेव मंदिर सरसावा
- जड़ौदा पांडा का तालाब
- जखवाला तालाब देवबंद
- पांडव तालाब रणखंडी
- लखनौती का किला
- गंगोह में हुमायूं द्वारा बनवाई मस्जिद