मौजूदा दौर में यूं तो सहारनपुर को काष्ठ हस्तशिल्प के लिए जाना जाता है, लेकिन इतिहास के पन्नों को देखें तो जिस फूलगोभी, लोकाट और पपीते का स्वाद आज पूरा देश चख रहा है, भारत में उसका जन्म पहली बार सहारनपुर की मिट्टी में हुआ था। चकराता रोड पर कंपनी बाग स्थित औद्यानिक प्रयोग एवं प्रशिक्षण केंद्र में करीब 350 साल पहले स्पेन से गोभी का बीज लाकर उगाया गया था।
औद्यानिक प्रयोग एवं प्रशिक्षण केंद्र के संयुक्त निदेशक सुरेश कुमार का कहना है कि उस समय तक भारत में कोई भी गोभी को नहीं जानता था। गोभी के पौधे को यहां की मिट्टी और जलवायु के हिसाब से तैयार करने के लिए कई वर्षों तक शोध चला।