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खास खबर: फ्रेट कॉरिडोर निर्माण की गति पड़ी सुस्त, रिहायशी क्वार्टर हटाने में देरी, पढ़िए पूरी रिपोर्ट

Fri, 31 Dec 2021 05:28 PM IST
कपिल kapil जगेंद्र उज्ज्वल, अमर उजाला, सहारनपुर

सार

सहारनपुर जनपद में अंग्रेजी हुकूमत के दौर से स्टेशन के पास रेलवे कॉलोनी और यार्ड बने हैं। वहीं शहरी क्षेत्र में रेल यार्ड और आवासीय कॉलोनी मार्ग में आने से ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट रेल कॉरिडोर का निर्माण सुस्त गति से चल रहा है।
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सहारनपुर। - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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सहारनपुर शहरी क्षेत्र में रेल यार्ड और आवासीय कॉलोनी मार्ग में आने से ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट रेल कॉरिडोर (डीएफसी) का निर्माण सुस्त गति से चल रहा है। जिले में मिट्टी और पुलों का निर्माण करीब 65 फीसदी पूरा हो गया है। रेलवे लाइन और स्टेशन के बराबर में अधिकांश मिट्टी भराव का कार्य पूरा हो गया है।

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अंग्रेजी हुकूमत के दौर से शहर में स्टेशन के पास रेलवे कॉलोनी और यार्ड बने हैं। परंतु डीएफसी के प्रस्तावित नक्शे में शहर के पांच किलोमीटर के दायरे में रेल यार्ड, एक पुल और कुछ आवासीय हिस्सा आ रहा है। खास बात है सहारनपुर से होकर साहनेवाल (पंजाब) तक गुजरने वाले प्रोजेक्ट को लेकर शहरी क्षेत्र में लाइन बिछाने के कार्य में ये बड़ी अड़चन है। पुरानी कॉलोनी के क्वार्टर और अन्य पक्के आवासीय निर्माण को हटाने में वक्त लग रहा है। खान आलमपुरा यार्ड लाइन के बीच में आ गया है, जो अभी तक नहीं हट सका। वहीं निर्माण एजेंसी मिट्टी कार्य पूरा करने के बाद रेलवे ट्रैक बिछाने की तैयारी में है। भूमि अधिग्रहण का मुआवजा दिए जाने के बावजूद कुछ स्थानीय लोगों द्वारा अतिरिक्त रुपये की मांग बाधा बनी है। 

126 में 90 पुलों का निर्माण पूरा
देवबंद क्षेत्र के रणखंडी से पिलखनी तक जिले में रेल प्रोजेक्ट का कार्य चल रहा है। प्रस्तावित बड़े 19 पुलों में 12 का निर्माण पूरा हो गया है। छह पर कार्य चल रहा है और एक पुल एनओसी की वजह से अधर में है। वहीं कुल 106 माइनर पुलों में 77 पुल तैयार हैं और 23 निर्माणाधीन हैं। इनमें छह पुलों की संबंधित विभाग से एनओसी प्रक्रिया पूरी नहीं होने से कार्य शुरू नहीं हो पा रहा है।
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न्यू सहारनपुर स्टेशन का निर्माण होगा
डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर में सहारनपुर रेलवे स्टेशन से एक किलोमीटर दूर न्यू सहारनपुर स्टेशन का निर्माण कराया जाएगा। जहां मालगाड़ियों में उत्पादों की लोडिंग, अनलोडिंग का कार्य होगा।

लॉजिस्टिक हब पर अभी निर्णय बाकी
ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर की लंबाई करीब 1856 किलोमीटर है, जो पश्चिम बंगाल के धनकुनी से पंजाब के साहनेवाल तक बनाया जा रहा है। इसका निर्माण 2022 तक पूरा होना है। खुर्जा के लॉजिस्टिक हब के बाद अंबाला में ही लॉजिस्टिक हब है। एक लॉजिस्टिक हब सहारनपुर या मुजफ्फरनगर में बनना है, लेकिन इसका स्थान अभी तय नहीं हुआ है। हालांकि केंद्रीय पशुधन राज्यमंत्री एवं मुजफ्फरनगर के सांसद संजीव बालियान का कहना है कि फ्रेट कॉरिडोर में मुजफ्फरनगर में भी लॉजिस्टिक हब (लोडिंग अनलोडिंग) बनेगा। इसके लिए उनकी रेल मंत्री और डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कार्पोरेशन ऑफ इंडिया (डीएफसीसीआईएल) के जीएम के साथ पूर्व में हुई बातचीत में सहमति हो चुकी है। 

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कार्यदायी कंपनी एलएंडटी के प्रोजेक्ट अधिकारी डॉ. रमन चौधरी ने बताया सहारनपुर में मिट्टी का कार्य 65 से 70 प्रतिशत पूरा हो गया है। पुलों का ज्यादातर कार्य पूरा हो गया है। सहारनपुर स्टेशन के पास रेल लाइन के बराबर में पुराने निर्माण, यार्ड और पुल को लेकर कुछ समस्या है। कंपनी सभी उलझनों को जल्द खत्म कराकर समय से प्रोजेक्ट पूरा कराने को प्रयासरत है।
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