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निर्यात योग्य बासमती के उत्पादन को बढावा देंगे कृषि वैज्ञानिक

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सहारनपुर। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक किसानों को निर्यात योग्य बासमती के उत्पादन के लिए टिप्स देंगे। इसमें किसानों को बासमती की खेती में जैविक कीटनाशकों के उपयोग करने के लिए जागरूक किया जाएगा। जिससे विदेशी मानकों पर जनपद की बासमती खरी उतर सके। इसके लिए किसानों को ऑनलाइन जानकारी दी जाएगी।
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विश्व में भारतीय बासमती चावल की खासी मांग है। निर्यात करने के लिए बासमती चावल को विदेशी मानकों पर खरा उतरना होता है। कई वर्ष पहले भारतीय बासमती चावल में रासायनिक कीटनाशकों के अवशेष मानकों से अधिक पाए गए थे। जिससे अमेरिका और यूरोपीय देशों में बासमती चावल का निर्यात प्रभावित हुआ था। इसको देखते हुए कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक किसानों को बासमती धान में रोग एवं कीट नियंत्रित करने के लिए जैविक कारकों का प्रयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। जैविक कीटनाशकों का प्रयोग करने से न सिर्फ फसल की लागत में कमी आएगी बल्कि बासमती चावल में कीटनाशकों की मात्रा भी नियंत्रित होगी।
जिले में 48 हजार हेक्टेयर में होती है बासमती की खेती
जनपद में 60 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान की खेती होती है। इसमें से बासमती धान की विभिन्न प्रजातियों की खेती का रकबा करीब 48 हजार हेक्टेयर रहता है। इसमें पूसा बासमती- 370, पूसा बासमती-01, पूसा बासमती- 1121, पूसा बासमती - 1637, पूसा बासमती- 1718, पूसा बासमती- 1509, तरावड़ी आदि प्रजातियां प्रमुख हैं।
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कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी डॉ. आईके कुशवाहा ने बताया कि जल्द ही किसानों को निर्यात योग्य बासमती धान की खेती के टिप्स दिए जाएंगे। बासमती धान पर आमतौर पर तना छेदक, पत्ती लपेटक, गाधी बग, शीथ ब्लाइट, नेक ब्लास्ट और भूरा छब्बा आदि कीट एवं रोग का प्रकोप रहता है। इनकी रोकथाम के लिए कृषि वैज्ञानिक किसानों को जैविक तरीकों की जानकारी देंगे।
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