मुजफ्फरनगर में ग्रिड फेल होने से पूरे मंडल की बिजली एक बार फिर गुल हो गई। भीषण गर्मी के बीच पांच घंटे बिजली न मिलने से उपभोक्ता गर्मी में बिलबिला उठे। पिछले करीब 20 दिन में तीसरी बार ग्रिड फेल होने से उपभोक्ताओं में रोष भी है, जो प्रदेश सरकार और विद्युत निगम अफसरों पर उपभोक्ताओं के हितों की अनदेखी करने का आरोप लगा रहे हैं।
गर्मी बढ़ते ही बिजली की किल्लत भी बढ़ती ही जा रही है। शनिवार की सुबह आपूर्ति चल रही थी, कि अचानक साढ़े 10 बजे पूरे जनपद की बत्ती गुल हो गई। बिजली सुबह साढे़ दस बजे जाने के बाद अपराह्न करीब साढ़े तीन बजे आई। हालांकि साढ़े तीन बजे भी जनपद के कुछ ही क्षेत्रों में आपूर्ति चालू हो सकी।
शनिवार को न्यूनतम तापमान 25 और अधिकतम तापमान 37 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। ऐसे में पांच घंटे की कटौती उपभोक्ताओं के लिए मुश्किल भरी रही। कई कॉलोनियों में पानी का संकट गहरा गया। पांच घंटे के कट का असर उद्योग-धंधे पर भी देखने को मिला। औद्योगिक क्षेत्र में दिनभर जनरेटर चलते रहे।
इसके अलावा देहात क्षेत्र में इन दिनों किसानों को गेहूं की फसल से खाली हुए खेतों की सिंचाई करनी है। इसके अलावा सब्जी और गन्ने की फसलें भी धूप में सूख रही हैं, जिनकी सिंचाई बेहद जरूरी है।
ऐसे में बिजली न मिलने पर किसान डीजल के इंजन से सिंचाई करने को मजबूर है, जिससे उनकी लागत बढ़ रही है। उधर, एक्सईएन नीरज कुमार ने बताया कि मुजफ्फरनगर में कई दिन से काम चल रहा है। इसी कारण शनिवार को आपूर्ति बंद रही।
बिजली आपूर्ति में हो रही मनमानी
बिजली आपूर्ति में विद्युत निगम के अधिकारी मनमानी कर रहे हैं। शासन के आदेशानुसार शहरी क्षेत्र में 18 घंटे, तहसील स्तर पर 14 घंटे और देहात क्षेत्र में दस घंटे बिजली दिए जाने के आदेश हैं।
मगर अधिकारी आदेशों का पालन नहीं कर रहे हैं। इसका बेहतर उदाहरण शहरी क्षेत्र में बना हकीमपुरा फीडर है, जहां से जुड़ी कालोनियों और गांवों को इन दिनों पांच से आठ घंटे ही बिजली दी जा रही है। देहात क्षेत्र की बात करें तो बेहट रोड से सटे क्षेत्र देहात में आते हैं, जिन्हें शहर के भी कुछ क्षेत्रों से अच्छी आपूर्ति की जा रही है, जो व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है।