गागलहेड़ी। एक परिवार की तीसरी पीढ़ी भारतीय सेना में अपनी सेवा देकर सीमा पर दुश्मनों के दांत खट्टे कर रही है। पिता पुत्र के बाद अब पोता भी राजोरी में एलओसी पर दुश्मन से मोर्चा ले रहा है।
गांव शरबतपुर निवासी सरदार स्वर्ण सिंह के बेटे सरदार लखबीर सिंह सेना में थे। लखबीर सिंह बताते है कि उनके पिता स्वर्ण सिंह रुड़की की बंगाल इंजीनियरिंग रेजिमेंट में भर्ती हुए थे। सन 1965 के भारत पाकिस्तान युद्ध में उन्होंने हिस्सा लिया था। इस लड़ाई में पाकिस्तानियों को आत्मसमर्पण करने पर भारतीय सैनिकों ने मजबूर कर दिया था। उसके बाद वह खुद भी रुड़की की बंगाल इंजीनियरिंग रेजिमेंट मे भर्ती हुए।
भारत पाकिस्तान के बीच चले कारगिल युद्ध में अमृतसर के बार्डर पर स्थित गुरदासपुर में तैनात रहते हुए उन्होंने दुश्मनों के दांत खट्टे किए। पिता-पुत्र के बाद अब सरदार लखबीर सिंह का इकलौता बेटा प्रदीप सिंह भी रुड़की की बंगाल इंजीनियरिंग रेजिमेंट से ही कश्मीर की राजोरी एलओसी लाइन पर तैनात दुश्मन की गोलीबारी का जवाब दे रहा है। सरदार लखबीर सिंह के छोटे भाई जसबीर सिंह ने भी सेना में भर्ती होकर अपनी सेवा दी है।