सहारनपुर के गंगोह क्षेत्र के मौनपालकों ने लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलकर कृषि उत्पाद अनब्रांडेड शहद को जीएसटी के दायरे से बाहर रखे जाने की मांग की। उनकी बात को गंभीरता से सुनकर मुख्यमंत्री ने न्याय संगत निर्णय लेने का आश्वासन दिया है।
शहद व्यवसाय को जीएसटी के दायरे में लाए जाने की चर्चाओं से चिंतित उत्तर प्रदेश बी कीपर्स फेडरेशन के एक प्रतिनिधिमंडल ने लखनऊ में जनता दरबार में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भेंट की।
वहां उन्होंने मुख्यमंत्री के समक्ष तर्कों के साथ अपनी बात रखी और कृषि उत्पाद अनब्रांडेड शहद को जीएसटी के दायरे से बाहर रखे जाने की अपील की। अध्यक्ष तंजीम अंसारी के नेतृत्व में गए प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को बताया कि प्रदेश में 10 लाख किसान मौन पालक के रूप में कार्यरत है।
यह व्यवसाय/खेती एक स्थान पर नहीं की जा सकती। मक्खियों को वर्ष में 6 से 8 स्थानों पर माइग्रेशन किया जाता है। इसलिए अन्य प्रदेशों में भी ले जाना पड़ता है।
इससे जीएसटी की प्रक्रिया जटिल हो जाएगी। बताया कि अनब्रान्डेड शहद कृषि उत्पाद की श्रेणी में आता है। इस कारण प्रदेश के संस्थागत वित्त, कर एवं निबंधन विभाग ने 13 जून 2013 में शासनादेश जारी करके इसे वैट से मुक्त किया था।
इसी प्रकार भारत सरकार की कृषि सचिव राधा सिंह ने 12 अप्रैल 2006 को जारी पत्र में अनब्रान्डेड शहद को कृषि उत्पाद माना था। ऐसे मे शहद उत्पादकों को राहत मिलनी ही चाहिए।
तंजीम अंसारी ने लखनऊ से लौटकर बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनता दरबार में जुटी भारी भीड़ के बावजूद उनकी बातों को गंभीरता से सुना और इस बारे में उनसे कुछ जानकारी भी ली।
सौंपे गए ज्ञापन में मधुमक्खी पालन से जुड़े कृषकों और कृषि पैदावार पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों से भी अवगत कराया गया। मुख्यमंत्री ने किसान हित में निर्णय लेने का भरोसा दिलाया। प्रतिनिधिमंडल में प्रवीण शर्मा, रविकांत मित्तल शामिल रहे।