सहारनपुर। महानगर में पानी की हर बूंद का हिसाब रखने की तैयारी शुरू हो गई है। पानी की बढ़ती खपत और भविष्य में संभावित जल संकट को देखते हुए केंद्र सरकार पूरे सप्ताह 24 घंटे जलापूर्ति योजना के तहत हर घर पर वाटर मीटर लगाने जा रही है। फिलहाल इसे पायलट प्रोजेक्ट के रूप में वार्ड 21 से लागू किया जाएगा। योजना सफल होने पर पूरे शहर में विस्तार होगा। यानी कि कहां पर कितना पानी खर्च हो रहा है इसका पूरा बिल वसूला जाएगा।
महानगर में करीब 1.67 लाख पानी कनेक्शन हैं। करीब साढ़े आठ लाख की आबादी को जलापूर्ति के लिए 127 बड़े नलकूप और 127 छोटे नलकूप लगे हैं। पूरे महानगर में 22 ओवरहैड टैंक स्थापित हैं। मानक के अनुसार एक व्यक्ति को प्रतिदिन 135 लीटर पानी की जरूरत होती है, लेकिन नगर निगम सहारनपुर में आबादी के अनुपात में अधिक पानी खर्च हो रहा है, जो पेयजल बचाने की दिशा में चिंता की बात है। प्रदेश के अन्य जनपदों में भी ऐसी ही स्थिति है। भविष्य में पेयजल संकट की आशंका को देखते हुए सरकार पूरे सप्ताह 24 घंटे जलापूर्ति योजना शुरू कर रही है। इसका मकसद पेयजल को बचाना है।
योजना को पूरे प्रदेश में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया जा रहा है। प्रदेश को कई जोन में बांटा गया है। सहारनपुर सहित 13 जनपद गाजियाबाद जोन में शामिल किए गए हैं। इन जनपदों के बड़े निकायों में एक या दो वार्डों का चयन किया गया है, जहां 24 घंटे जलापूर्ति की जाएगी। नगर निगम सहारनपुर क्षेत्र से वार्ड 21 को शामिल किया गया है। इससे सटे वार्ड 37 और 39 की भी कुछ कॉलोनियों को लिया है। प्रत्येक घर तक अलग पाइपलाइन जाएगी, जिसके साथ वाटर मीटर लगेगा। 24 घंटे पानी की आपूर्ति का हिसाब मीटर में रहेगा। भविष्य में बिजली की तरह पानी खर्च का बिल भी वसूला जाएगा, जिससे कि लोग पानी की उपयोगिता को समझ सकें और उसे बर्बाद करने से बचें।
2,730 घरों में दिए जाएंगे कनेक्शन
योजना के तहत अलग से पाइपलाइन बिछाई जाएगी साथ ही ओवरहैड टैंक और दो नलकूप स्थापित किए जाएंगे। 2,730 घरों में अलग से वाटर कनेक्शन दिए जाएंगे, जिनके साथ मीटर लगा होगा। पायलट प्रोजेक्ट के लिए सहारनपुर में 13.12 करोड़ रुपये से अधिक की लागत आएगी। जमीन तलाश ली गई है।
पूरे सप्ताह 24 घंटे जलापूर्ति योजना पर गंभीरता के साथ काम चल रहा है। टेंडर की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। प्रयास यही है कि सरकार की मंशा के अनुरूप योजना को सफलतापूर्वक लागू किया जा सके। साथ ही पेयजल को बर्बाद होने से बचाया जा सके। - रुचिन यादव, अधिशासी अभियंता, जल निगम।