देवबंद (सहारनपुर)। कथा व्यास संत प्रियदास जी महाराज ने श्रीरामकथा में आठवें दिन रामगमन की कथा का चित्रण किया। कहा कि प्रभु दीन-दुखियों के घर जरूर आते हैं। बेसहारों का सहारा भगवान होते हैं।
श्री गीता भवन में चल रही रामकथा में शनिवार को संत प्रियदास जी महाराज ने कहा कि तुलसीदास ने रामचरित मानस में कहा है कि प्रभु जगत में ऐसा कौन सा स्थान है जहां पर आप नहीं रहते। संत ने कहा कि प्रभु तो घट-घटवासी हैं। प्रभु सबके भीतर वास करते हैं परंतु प्राणी पहचान नहीं पाता है। जो प्राणी श्री रामकथा का प्रेम से श्रवण करते हैं उनके ही हृदय में श्रीराम का वास होता है। आदर्श व चरित्रवान प्राणी ही प्रभु की भक्ति प्राप्त कर सकते हैं। संत ने बताया कि सांसारिक मोह माया में प्राणी ने राम के चरित्र विवेक को भुला दिया। साध्वी चित्रा शुक्ला ने बताया कि जब-जब धर्म की हानि होती है तब-तब प्रभु धरती पर अवतरित होते हैं। गोमाता की सेवा सबसे बड़ी सेवा है। गोमाता में प्रभु स्वयं वास करते हैं। संसार के हर प्राणी को सुख पहुंचाना ही प्रभु की सच्ची पूजा है। भूखे को रोटी और प्यासे को पानी देना सबसे बड़ा धर्म है। कथा के यजमान विजय कुमार रहे। प्रसाद वितरण मनोज गर्ग व मोहन गर्ग ने किया। इस मौके पर पं. विनय प्रकाश तिवारी, सुधीर गर्ग, पंकज अग्रवाल, श्याम गोपाल तिवारी, सुभाष मित्तल, नीरज मित्तल, अंकित मित्तल, सोनू बंसल, डा. कांता त्यागी, अनिता बंसल आदि रहे।