साक्षरता पांच प्रतिशत, स्कूल ही नहीं जा पाती गांव की बेटियां
बेहट (सहारनपुर)। सरकार सर्व शिक्षा अभियान पर भारी भरकम बजट खर्च कर बच्चों को स्कूल भेजने पर जोर तो दे रही है, लेकिन अभी तक सरकार का ध्यान उन गांवों की तरफ नहीं गया, जहां आज तक सरकारी स्तर से स्कूल की कोई व्यवस्था नहीं की जा सकी।
करीब ढाई हजार की आबादी वाले फतेहपुर गांव में प्राथमिक विद्यालय की स्थापना आज तक नहीं हो सकी है, जिसके चलते यहां के बच्चों को 2 किमी की दूरी तय करने के बाद दूसरे गांव में पढ़ाई करने के लिए जाना पड़ता है। अधिकतर बेटियां तो विद्यालय दूर होने के कारण स्कूल ही नहीं जा पाती है। बताया गया कि यह गांव पहले फतेहपुर टांडा ग्राम पंचायत के अंतर्गत था। बाद में नए परिसीमन के मुताबिक टांडा और फतेहपुर अलग हो गए थे। इन दोनों गांवों के बीच की दूरी करीब 2 किमी है। प्राथमिक विद्यालय टांडा गांव में है, जबकि फतेहपुर में आज तक सरकारी स्तर से कोई प्राथमिक विद्यालय तक नहीं बन पाया है। यही कारण है कि अधिकतर बेटियां स्कूल दूर होने के कारण शिक्षा से पूरी तरह वंचित है। स्कूल जाने वाले लड़कों की संख्या भी कम ही है । ग्रामीण मेघराज, रमेश, लियाकत, भूरा, चंद्रभान, बाला, सेवाराम, असगर, राकेश आदि का कहना है, कि कुछ बच्चे तो स्कूल चले जाते हैं, परंतु गांव की बेटियां स्कूल दूर होने की वजह से जा ही नहीं पाती है।
वर्ष 2014 से नए विद्यालयों की स्थापना की प्रक्रिया बंद पड़ी है। शासन द्वारा जैसे ही नए विद्यालयों के लिए प्रपोजल मांगे जाएंगे तो संबंधित गांव में विद्यालय की स्थापना का प्रपोजल प्राथमिकता पर भेजा जाएगा। - त्रिवेंद्र सिंह, खंड शिक्षा अधिकारी साढ़ोली कदीम।
उनके द्वारा गांव में विद्यालय स्थापना की बाबत कई बार लिखित प्रार्थना पत्र संबंधित विभाग एवं प्रशासनिक अधिकारियों को दिया चुका है। वह जिलाधिकारी से भी मिले थे, लेकिन उनकी किसी भी स्तर पर कोई सुनवाई नहीं हुई। गांव में विद्यालय नहीं होने से साक्षरता की दर मात्र 5 प्रतिशत है। नौशाद, ग्राम प्रधान फतेहपुर
गांव के विशाल का कहना है कि दूर होने के कारण वह स्कूल नहीं जा पाते। घरवाले भी इतनी दूर स्कूल भेजने से कतराते हैं।
गांव की आरती का कहना है कि घरवाले इतनी दूर स्कूल नहीं भेजते। उनके गांव से दूसरे गांव में स्कूल जाने के लिए पैदल ही जाना पड़ता है।
गांव की दीपा का कहना है कि लड़की होने की वजह और उनके मां-बाप पुराने ख्यालों के होने के कारण उसे दूर स्कूल भेजने से डरते है। यदि गांव में स्कूल होता तो वह जरूर पढ़ती।