सहारनपुर। यूपी बोर्ड में 12वीं का परिणाम बंपर रहने से एक ओर जहां उत्तीर्ण हुआ प्रत्येक विद्यार्थी उत्साहित है, वहीं इस परिणाम ने उनकी स्नातक में दाखिले की टेंशन बढ़ा दी है। दरअसल, पास हुए विद्यार्थियों की संख्या 30 हजार के करीब है, जबकि जनपद के राजकीय और एडेड महाविद्यालयों में स्नातक प्रथम वर्ष की सीटों की संख्या पांच हजार ही है। ऐसे में 25 हजार विद्यार्थी गृह जनपद में दाखिले से वंचित होना पड़ेगा।
12वीं की परीक्षा में इस बार जनपद के करीब 34 हजार विद्यार्थी शामिल हुए। परिणाम 88.94 फीसदी रहने की वजह से करीब 30 हजार विद्यार्थियों ने सफलता हासिल की है। जनपद में छह राजकीय कॉलेज हैं, जो बेहट, देवबंद, कोटा, नानौता, गंगोह और पुवांरका में स्थित हैं। इतने ही एडेड कॉलेज हैं, जिनमें जेवी जैन कॉलेज, गोचर महाविद्यालय, महाराज सिंह कॉलेज, मुन्नालाल एंड जयनारायण खेमका गर्ल्स कॉलेज, इंस्लामिया डिग्री कॉलेज शामिल हैं। इन कॉलेजों में स्नातक प्रथम वर्ष की सीटों की बात करें तो पांच हजार भी नहीं हैं। यानी 25 हजार विद्यार्थियों के सामने दाखिले की समस्या खड़ी होनी लाजिमी है। ऐसे में छात्रों के सामने पढ़ाई जारी रखने के लिए जनपद छोड़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। इसमें भी ग्रामीण क्षेत्र की लड़कियों के लिए समस्या होने वाली है, जिनको परिजन बाहर भेजने से कतराते हैं।
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प्रमुख कॉलेजों में स्नातक प्रथम वर्ष की सीटों की स्थिति
कॉलेज का नाम---- बीए--- बीएससी---- बीकॉम-----बीबीए
मुन्नालाल कॉलेज, 660---------00-----------160--------00
जेवी जैन कॉलेज, 420---------120----------180-----------00
महाराज सिंह कॉलेज, 320---------480-------00-----------00
गोचर महाविद्यालय, 160-----------380--------140-----------60
राजकीय महाविद्यालय बेहट, 160---120---------60----------00
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निजी शिक्षण संस्थाओं की स्थिति
जनपद में ग्लोकल यूनिवर्सिटी और शोभित यूनिवर्सिटी के अलावा 24 से अधिक निजी डिग्री कॉलेज हैं। मगर विद्यार्थियों की पहली पसंद राजकीय और एडेड कॉलेज ही होते हैं। इनमें दाखिला न मिलने की वजह से वह मजबूरन उक्त यूनिवर्सिटी या निजी कॉलेजों का रुख करते हैं। यूनिवर्सिटी और निजी कॉलेजों को दूसरी पसंद पर रखने का मुख्य कारण मोटी फीस है। साथ ही निजी कॉलेजों द्वारा छात्रों से तरह-तरह के शुल्क लिया जाना भी उन्हें निजी कॉलेजों से दूर करता है। गत वर्षों में बीएड के छात्रों के आंदोलन इसके बेहतर उदाहरण हैं।